पुणे की पहचान विद्या की नगरी और सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर रही है। लेकिन जिस तरह से पुणे में दिन ब दिन अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है, उसे देखते हुए यह सवाल कौंधने लगा है कि कहीं पुणे अपना पुराना वैभव और पहचान तो नहीं खो बैठेगा? कभी शांत रहने वाला पुणे, अब पुलिस की अपराधियों पर निगरानी की कमी और गृह विभाग की पुलिस पर निगरानी की कमी के कारण बेहद अशांत हो गया है। हत्या, मारपीट, बलात्कार और जबरन वसूली की घटनाओं ने पुणे में गुंडों के गिरोहों ने आतंक पैदा कर दिया है। शहर के विभिन्न इलाकों में अपराधियों के गिरोह बढ़ने लगे और उन इलाकों में कानून का नहीं, बल्कि अपराधियों का राज स्थापित हो गया। पुलिस की निगरानी कम होने से अपराधियों का प्रभाव बढ़ा और राजनीतिक संरक्षण के चलते गुंडों के ये गिरोह बेलगाम हो गए हैं। पुणे के तलजाई हिल पर हुई ताजा घटना पुणे पुलिस के लिए शर्मनाक कही जा सकती है। फिटनेस अकादमी के डेढ़ से दो सौ युवक-युवतियां हर दिन पुलिस भर्ती की तैयारी के लिए तलजाई हिल आते हैं। मंगलवार की सुबह हमेशा की तरह पहाड़ी पर अभ्यास करने आई युवतियों के साथ लगभग ५०-६० पहलवान गुंडों की टोली ने धक्का-मुक्की की। अभ्यास के लिए प्रशिक्षु लड़के-लड़कियों के मैदान में पहुंचने से पहले चार गुंडे इंतजार कर रहे थे। जब लड़कियों ने उन चारों से हटने और उन्हें अभ्यास करने देने का अनुरोध किया, तो उन्होंने लड़कियों के साथ
धक्का-मुक्की और गाली-गलौज
शुरू कर दी। उसके बाद, ५०-६० पहलवानों का एक और गुट वहां आ धमका। जब अकादमी के प्रशिक्षु लड़कों ने पहलवानों की इस टोली को रोकने की कोशिश की, तो उनके साथ भी बुरी तरह से मारपीट की गई। महाराष्ट्र पुलिस बल में नौकरी पाने के लिए प्रशिक्षण ले रही लड़कियों पर हाथ डालते समय इन पहलवान गुंडों को जन और मन की लाज तो नहीं ही आई, लेकिन उन्हें पुलिस का डर भी नहीं लगा। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि अपराधियों के मन में डर का गायब होना पुलिस प्रशासन और पर्यायी तौर पर राज्य के गृह विभाग, यानी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की विफलता है। पुणे में ‘भाईगीरी’ क्यों बढ़ रही है, इसका जवाब गृह विभाग के प्रभारी ‘देवाभाऊ’ से नहीं तो और किससे पूछा जाना चाहिए? खैर, इतना कुछ होने के बाद भी, पुणे पुलिस ने गुंडों के गिरोह के खिलाफ कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की। पुलिस खुद तो मौके पर आई नहीं, लेकिन विनयभंग, छेड़छाड़, मारपीट और गाली-गलौज की शिकायत लेकर सहकार नगर थाना पहुंचे लड़के-लड़कियों की पुलिस ने सुध तक नहीं ली। थाने के सामने धरने पर बैठने के बाद भी पुलिस ने उनकी कोई परवाह नहीं की। आखिरकार, इन लड़के-लड़कियों ने पुलिस आयुक्तालय पर मोर्चा खोला। हालांकि, घटना मंगलवार सुबह ८ बजे की है, लेकिन पुलिस ने इस मामले में शाम ७ बजे के बाद केस दर्ज किया। हैरान करने वाली बात यह है कि गुंडों के इस गिरोह पर कार्रवाई न करने के लिए पुलिस अधिकारियों पर
सीधे मंत्रालय से ही
दबाव था, अब ऐसी जानकारी सामने आ रही है। अगर सरकार इस तरह अपराधियों के गिरोहों को बचाने का काम कर रही है, तो पुलिस को दोष देने का क्या फायदा? पुलिस भरती की तैयारी में लगी हुई लड़कियों की गंभीर शिकायत है कि अभ्यास के दौरान, ये पहलवान गुंडे गंदी नजरों से देखते हैं, अक्सर अभद्र टिप्पणियां करते हैं, फेसबुक व इंस्टाग्राम पर दोस्ती करने की धमकी देते हैं और रोज घर तक उनका पीछा करते हैं। हालांकि, विनयभंग, छेड़छाड़ की शिकायतों सहित इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद, सहकार नगर थाने की पुलिस इन लड़कियों के बजाय अपराधियों का साथ देती रही। चूंकि पुलिस को अपराधियों के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई करने की आजादी नहीं है, इसलिए पुणे में अपराध बढ़ गए हैं। बढ़ते अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुणे में सात नए पुलिस स्टेशन खोले जा रहे हैं। लेकिन अगर पुलिस हुक्मरानों के आदेश पर अपराधियों के पक्ष में खड़ी है, तो कई नए पुलिस स्टेशन खोलने का क्या फायदा? तलजाई हिल पर पुलिस भर्ती के लिए अभ्यास कर रहे लड़के-लड़कियों पर गुंडों के एक गिरोह द्वारा किया गया हमला सभ्य कहे जाने वाले पुणे को बदनाम कर रहा है। पुणेकर पहले गर्व से कहा करते थे ‘पुणे में क्या कमी है?’ लेकिन, पुणे में हाल ही में बढ़े अपराध को देखते हुए, पुणेकरों पर, ‘पुणे में अपराध है, अपराध ही अपराध है।’ कहने की नौबत आ गई है। क्या ‘देवाभाऊ’ का गृह मंत्रालय पुणे में इस ‘भाईगीरी’ को खत्म करने वाला है?
