सूफी खान
दरअसल, इस्लाम की सबसे पवित्र किताब कुरान-ए-करीम की सबसे बड़ी आयत सूरह बकरह की आयत १७८ का हवाला देकर ही भारत के ग्रैंड मुफ्ती हजरत एपी अबू बकर मुसलियार साहब ने निमिषा प्रिया की सजा को टलवाया है। सूरह अल बकरह में २८६ आयतें हैं। अरबी में बकरह का अर्थ है गाय। यह आयत मदीना में नाजिल हुई थी। सूरह अल बकरह इस्लामी कानून, सामाजिक न्याय, माफी, अनाथों के साथ व्यवहार, अनुबंधों, कर्ज और ब्याज सहित कई मुद्दों पर इंसानों की रहनुमाई करती है।
भारत वर्ष के ग्रैंड मुफ्ती मुसलियार साहब ने कुरान की सूरह अल-बकरह की आयत नंबर १७८ का हवाला दिया, जिसमें मौत के बदले सजा और माफ कर देने के सिद्धांत को समझाया गया है। इसी बिना पर उन्होंने यमन के इस्लामिक स्कालर से बात की और फिर उन स्कॉलर्स ने यमन सरकार से मशविरा किया। कुरान के मुताबिक, सूरह बकरह आयत नंबर १७८ में अल्लाह फरमाता है, ऐ अल्लाह पर भरोसा रखने वालों मारे गए शख्स के परिवार वाले कातिल को माफ भी कर सकते हैं और बदला लेने से मना करके ‘दियत’ यानी ब्लड मनी मुआवजे की रकम ले सकते है। वहीं मृतक के परिवार वालों को बदला लेने का भी हक है। वह मौत के बदले कातिल की मौत की मांग कर सकता है, जिसे ‘किसासा’ कहा जाता है। साथ ही माफ करने के बाद जो ज्यादती करे उस पर अल्लाह का ‘अजाब’ उसका ‘कहर’ नाजिल होगा। भारत के ग्रैंड मुफ्ती ने यमन के विद्वानों और निमिषा के हाथों मारे गए तलाल के भाई अब्देल फतह मेहंदी से बात की है। उन्हें सूरह अल बकरह की आयत का हवाला दिया। अल्लाह माफ करने वालों के साथ है। ग्रेड मुफ्ती ने निमिषा की बेटी और उनके परिवार की गरीबी का भी जिक्र कर मेहंदी परिवार को कन्वेंस करने की कोशिश की है और यह बताया है कि अल्लाह रहम करने वालों और दया करने वालों को पसंद करता है।
