-सिर्फ एसी लोकल में नजर आते हैं टीसी
-छुट्टी के दिनों में प्रथम श्रेणी के यात्रियों की सांस जाती फूल
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई की लोकल ट्रेनों में भीड़ होना आम बात है। प्रतिदिन लाखों यात्री लोकल में सफर करते हैं और काफी यात्री बेटिकट भी यात्रा करते हैं। त्योहारों के दौरान अधिक भीड़ होने की वजह से सेकंड क्लास के यात्री फर्स्ट क्लास में चढ़ जाते हैं और इस वजह से फर्स्ट क्लास डिब्बे में भीड़ बढ़ जाती है। फर्स्ट क्लास में रोजाना सफर करनेवाले यात्रियों का कहना है कि एसी लोकल आने के बाद टीसी की मौजूदगी सिर्फ वहीं रहती है। आरामदायक वातावरण में वे ड्यूटी करना चाहते हैं और फर्स्ट क्लास डिब्बों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ गई।
पिछले हफ्ते गणेशोत्सव के चलते लोकल ट्रेन से यात्रा करनेवाले यात्रियों की तादाद बढ़ गई। सेकंड क्लास में अधिक भीड़ होने के कारण कई लोग फर्स्ट क्लास में सफर किए, इससे अधिक पैसे देकर भी फर्स्ट क्लास वाले यात्रियों का सफर सुहाना नहीं रहा। सांताक्रुज में रहनेवाली यात्री भावना दुबे ने बताया कि उन्होंने विरार से चर्चगेट का फर्स्ट क्लास का पास बनाया है, लेकिन जब भी रविवार या त्योहार का सीजन रहता है तो उन्हें फर्स्ट क्लास में खड़े होने की जगह भी नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि एसी लोकल आने के बाद टीसी सिर्फ एसी लोकल में ही दिखते हैं। फर्स्ट क्लास डिब्बे में अब टीसी कम दिखाई देते हैं। वहीं नालासोपारा में रहने वाली सुर्वा ने बताया कि उनका विरार से लेकर अंधेरी तक फर्स्ट क्लास का पास है, लेकिन उन्हें त्योहार के दौरान अधिक भीड़ का सामना करना पड़ता है। इस भीड़ में बेटिकट यात्रियों की तादाद अधिक रहती है, जिससे उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
जब इस संवाददाता ने स्टेशन पर मौजूद कुछ टीसी से बातचीत की तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई टीसी चाहते हैं कि उन्हें एसी लोकल में ड्यूटी मिले ताकि ठंडी हवा में काम किया जाए। इसके अलावा बार-बार स्टेशन पर उतरकर डिब्बे बदलने की भी जरूरत नहीं होती है, जो अमूमन साधारण लोकल ट्रेनों में समस्या होती है। पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक से इस मुद्दे पर बातचीत करने के लिए संपर्क साधा गया, लेकिन बातचीत नहीं हो पाई।
एसी लोकल में दो एंट्री!
यात्रियों ने मांग की है कि फर्स्ट क्लास के यात्रियों को एसी लोकल में सफर करने की अनुमति दी जाए, क्योंकि फर्स्ट क्लास व एसी लोकल के किराए में ज्यादा अंतर नहीं है, ऐसे में रेलवे बोर्ड को इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए।
