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अनूठी पहल, काशी के मंदिरों में होगी निशुल्क पूजा

हिमांशु राज़

वाराणसी। आस्था की नगरी काशी अपने अद्भुत और अनूठे धार्मिक संस्कारों के लिए जानी जाती है। परंपराओं की इसी लंबी धारा में अब एक नई कड़ी जुड़ रही है। इतिहास में पहली बार काशी के छह प्रमुख मंदिरों में भक्तों को निशुल्क ऑनलाइन पूजन की सुविधा उपलब्ध होने जा रही है। इस अभिनव पहल से वे श्रद्धालु भी लाभान्वित हो सकेंगे, जो दूरी, समय अथवा परिस्थिति के कारण काशी पहुंच पाने में असमर्थ रहते हैं, किंतु अपने आराध्य के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण रखते हैं।

इस नई परंपरा का शुभारंभ 14 सितंबर को जीवित्पुत्रिका व्रत के अवसर पर होगा। उस दिन मां संतान लक्ष्मी के पूजन से इस ऑनलाइन सेवा की विधिवत शुरुआत की जाएगी। जिन मंदिरों को इस पावन योजना से जोड़ा गया है, उनमें महालक्ष्मी मंदिर, बाबा कालभैरव, गौरीकेदारेश्वर, लोलार्केश्वर महादेव, बड़ी शीतला और अन्नपूर्णा मंदिर सम्मिलित हैं। इन देवालयों में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं और अब समय व दूरी की सीमाओं से परे रहकर भी पूजन में सहभागी हो सकेंगे।

यह पहल बड़ी शीतला मंदिर के महंत परिवार के सद्भाव और संकल्प से संभव हुई है। महंत पं. शिवप्रसाद पांडेय लिंगिया महाराज की प्रेरणा से उनके पुत्र पं. अवशेष पांडेय कल्लू महाराज ने इसका संचालन संभाला है। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मोबाइल नंबर 7459016660 जारी किया है। कोई भी व्यक्ति इस नंबर पर अपना नाम, गोत्र और निवास स्थान भेजकर निःशुल्क बुकिंग कर सकता है।

पूजा-पाठ की भरपूर शुचिता और व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए छह मंदिरों में कुल 24 पुजारियों की नियुक्ति की गई है। प्रत्येक मंदिर में चार पुजारी विशेष रूप से ऑनलाइन पूजन कराएंगे और भक्तों के नाम व गोत्र का उच्चारण कर विधिपूर्वक अनुष्ठान संपन्न करेंगे। देश-विदेश से जुड़े श्रद्धालुओं को प्रसाद और पूजन का वीडियो कुरियर द्वारा भेजा जाएगा, वहीं स्थानीय भक्तों को मंदिर आकर प्रसाद व रिकॉर्डिंग प्राप्त करने की सुविधा दी जाएगी।

महंत परिवार का कहना है कि इस संकल्प के पीछे केवल सेवाभाव और श्रद्धालु जनों की सुविधा की भावना निहित है। इसके लिए कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। भक्तजन केवल अपने नाम और आस्था के सहारे काशी के देवताओं से संबंध जोड़ सकेंगे। आधुनिक तकनीक और प्राचीन धर्म परंपरा का यह संगम काशी की वंदनीय परंपरा को एक नए युग में प्रवेश कराता है।

यह योजना केवल पूजन की व्यवस्था भर नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों भारतीयों के लिए सुकून और आश्वस्ति का आश्रय है, जिनके मन सदैव काशी की ओर पुलकित रहते हैं। माँ अन्नपूर्णा की कृपा, कालभैरव का संरक्षण, संतान लक्ष्मी का आशीर्वाद और शिवत्व का सान्निध्य अब हर श्रद्धालु तक सहज ही पहुंच पाएगा। काशी की यह पहल अध्यात्म के क्षितिज पर एक नवीन उदाहरण बनेगी, जहाँ भक्ति की धारा समय और भौगोलिक सीमाओं से परे प्रवाहित होती रहेगी।

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