– नियुक्तियों के बाद इस्तीफों की लगी झड़ी
सामना संवाददाता / मुंबई
भले ही शिवसेना के साथ गद्दारी कर शिंदे गुट ने भाजपा के साथ सत्ता हासिल की है, लेकिन आज भी शिंदे गुट के पास कार्यकर्ता और नेता नहीं हैं, जिसके चलते शिंदे गुट में मुंबई में अब तक पदाधिकारियों की पूरी तरह से घोषणा नहीं हो सकी है। कुछ जगहों पर विभाग प्रमुख नियुक्त किए जा रहे हैं। ऐसे लोगों को नेता बनाया जा रहा है, जिनकी गत चुनाव में जमानत तक जब्त हो चुकी है।
नतीजतन कार्यकर्ताओं के बीच भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई जगहों पर अब यह नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। कइयों ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है, जिसके चलते शिंदे गुट के नेताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं। इस गुट में विभागप्रमुखों की नियुक्ति को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। कई जगह खुलकर विरोध शुरू हो गया है। शिंदे गुट के नेता मिलिंद देवड़ा कार्यकर्ताओं की इस नाराजगी को अभी तक नियंत्रित नहीं कर पाए हैं। हर दिन नई-नई नाराजगी की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक नाराजगी शिवड़ी विधानसभा क्षेत्र में भी देखने को मिल रही है। यहां पूर्व नगरसेवक नाना आंबोले को विभागप्रमुख नियुक्त किया गया है, लेकिन नाना आंबोले विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार गए थे और उनकी जमानत तक जब्त हो गई थी इसलिए उनकी नियुक्ति से शिवड़ी क्षेत्र के शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में भारी असंतोष है। विलेपार्ले के पुराने शिवसैनिक जितेंद्र जानावले ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि उन्हें विभागप्रमुख पद वहां भी नहीं मिला और शिंदे गुट में भी नहीं मिला। इसी तरह गोरेगांव-दिंडोशी के गणेश शिंदे और चारकोप के संजय सावंत ने भी नाराजगी जताई थी। पश्चिमी उपनगर में कई पदाधिकारियों के नाराज होने की चर्चा है और कुछ ने तो इस्तीफे की भी चेतावनी दी है। इन नाराज कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सांसद श्रीकांत शिंदे से मुलाकात की है। उन्हें फिलहाल संयम बरतने और इंतजार करने की सलाह दी गई है, लेकिन यदि मनपा चुनाव तक यह नाराजगी दूर नहीं की गई तो पार्टी को बड़ा नुकसान हो सकता है। ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है।
खुलकर नाराजगी जता रहे पुराने पदाधिकारी
शिंदे गुट ने चुनाव से पहले मुंबई के विभाग प्रमुखों की नई सूची घोषित की है। इस सूची में उनके साथ आए कुछ पदाधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, लेकिन इस सूची के सामने आने के बाद शिंदे गुट के पुराने पदाधिकारी खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। शिंदे गुट ने नाराजगी से बचने के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में एक-एक विभाग प्रमुख नियुक्त किया है। पहले तीन विधानसभा क्षेत्रों पर एक विभागप्रमुख होता था, अब यह पद्धति बदल दी गई है।
