सामना संवाददाता / मुंबई
तारणे में हुई एसटी दुर्घटना के चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन इस दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को अभी तक एक कौड़ी का मुआवजा नहीं मिला है। सभी दस्तावेज जमा किए चार महीने बीत जाने के बाद भी एसटी निगम के अधिकारी मुआवाजा देने में टालमटोल कर रहे हैं इसलिए दुर्घटना में मरने वालों के परिवार वाले एसटी कार्यालय के दरवाजे पर बार-बार दस्तक देकर पूछ रहे हैं कि अगर मुआवाज नहीं मिला तो हम कहां जाएंगे।
गौरतलब हो कि चार महीने पहले ८ मई को तारणे के एक खतरनाक मोड़ पर एसटी की बस एक डंपर से टकरा गई थी। यह दुर्घटना इतनी भयानक थी कि पांच यात्रियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। मरने वालों में तृप्ति खुटीकर, लक्ष्मण ढेबे, अनन्या गव्हाणे, विट्ठल कजबजे, अविनाश वजरे का सामवेश था। दुर्घटना के बाद एसटी से नियमानुसार मरने वालों के परिवार वालों को आर्थिक सहायता दी जाती है। मरने वालों के आश्रितों ने आर्थिक सहायता पाने के लिए फार्म भरकर दिया और साथ में सभी दस्तावेज भी संलग्न करके संबंधित अधिकारियों के पास जमा किए। बताया जाता है कि एसटी अधिकारियों ने मौके पर जाकर दुर्घटना की जांच की और ऑडिट भी किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों से हलफनामे भी लिए। इस तरह की सभी कानूनी प्रक्रिया पूरे हुए चार महीने बीत गए। इसके बावजूद भी दुर्घटना में मरने वालों के परिजनों को एक कौड़ी की आर्थिक सहायता एसटी की ओर से नहीं मिली। मृतक के एक रिश्तेदार अविनाश खुटीकर ने आरोप लगाया है कि एसटी प्रशासन आर्थिक सहायता देने में टालमटोल कर रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के बाद निर्णय
एसटी के रामवाड़ी संभाग के यातायात नियंत्रक प्रबोध राखाड़े ने बताया कि दुर्घटना में मारे गए लोगों के लिए धनराशि स्वीकृत कर दी गई है। आगे का निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के बाद ही लिया जाएगा।
