सामना संवाददाता / मुंबई
न्यूमरोलॉजी पर आधारित चित्रकला की नई विधा की शुरुआत करने वाली मशहूर चित्रकार सुश्री प्रणिता घोड़े की अनूठी कला प्रदर्शनी “ग्रह पूर्ति यन्त्रम” आगामी 2 जुलाई, 2026 से मुंबई में आयोजित की जा रही है।
यह जानकारी देते हुए मुंबई महानगर की प्रमुख सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था “आकृति आर्ट फाउंडेशन” के डायरेक्टर मनमोहन जायसवाल ने बताया कि यह अनूठी कला प्रदर्शनी मुंबई के भूला भाई देसाई रोड स्थित सिमरोज़ा आर्ट गैलरी में 2 जुलाई से 5 जुलाई, 2026 तक सभी दर्शकों के नि:शुल्क अवलोकनार्थ खुली रहेगी। 2 जुलाई, 2026 को इस कला प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध साहित्यकार, वरिष्ठ समाजसेविका और लोढ़ा फाउंडेशन की अध्यक्षा श्रीमती मंजू लोढ़ा शामिल होंगी। साथ ही अन्य प्रमुख अतिथियों के रूप में मशहूर भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा, प्रख्यात शास्त्रीय गायिका पद्मश्री डॉ. सोमा घोष, वरिष्ठ उद्योगपति अजोयकांत रुइया, समाजसेविका मालती जैन, किशोर जैन खाबिआ और देवेंद्र गुरुजी के अलावा महानगर के प्रबुद्ध कलाप्रेमी उपस्थित रहेंगे।
उल्लेखनीय है कि सुश्री प्रणिता पिछले 15 वर्षों से न्यूमरोलॉजी के अंतर्गत भाग्यांक और मूलांक पर आधारित पेंटिंग करती हैं। इस बारे में सुश्री प्रणिता ने बताया कि पिछले 15 वर्षों के अध्ययन, अनुभव और निरंतर शोध के आधार पर उन्होंने जन्मतिथि के अंकों पर आधारित व्यक्तिगत ‘ग्रहपूर्ति यंत्र’ की संकल्पना विकसित की है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति की जन्मतिथि के अंकों के संतुलन, उनके गणितीय संबंधों का अध्ययन तथा उन्हें कलात्मक रूप में कैनवास पर प्रस्तुत करना शामिल है। उनका मानना है कि यह कला, न्यूमरोलॉजी और रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक अनूठा संगम है। उनका कहना है कि यह विधा कला के क्षेत्र में उनकी गहन खोज का निष्कर्ष है। उन्होंने कहा कि उनकी कला न केवल एक विजुअल ब्यूटी है, बल्कि यह जीवन में अनुकूलता, सुख-शांति और समृद्धि भी लाती है।
उन्होंने बताया कि ग्रहपूर्ति यंत्र अथवा शुभ-अशुभ पूरी तरह व्यक्ति की श्रद्धा और विश्वास का विषय है। पूरी दुनिया में लोशो ग्रिड को विशेष महत्व दिया जाता है। जन्मतिथि के अनुसार जिन अंकों की आवश्यकता होती है, उनके संतुलन के लिए महंगे रत्न, विशेष रंग, पेड़ों की जड़ें तथा विभिन्न प्रकार के उपाय और रेमेडीज़ बताए जाते हैं। लेकिन इन सभी तरीकों में लोशो ग्रिड के मूल अंकों को बदला नहीं जाता। हिंदू धर्म में श्री यंत्र, लक्ष्मी यंत्र आदि में अंकों की स्थिति सुनिश्चित मानी जाती है, जिन्हें ग्रहों की शुभ स्थिति और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन्हें घर में स्थापित करने से सकारात्मक आभामंडल निर्मित होता है, जो व्यक्ति के जीवन पर लाभकारी प्रभाव डालता है तथा मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।
उन्होंने बताया कि ग्रहों की राशि में जैसे अनेक अंक अंतर्निहित होते हैं, उसी प्रकार अंतरिक्ष में अनेक ग्रह-गोल विद्यमान हैं। इस विषय पर प्रसिद्ध भारतीय खगोलशास्त्री जयंत नारळीकर ने अपने गुरुत्वीय स्थिरांक सिद्धांत का प्रतिपादन किया है। उनके अनुसार, प्रत्येक ग्रह द्वारा घेरे गए अंतरिक्ष और उसके गुरुत्वाकर्षण के बीच का अनुपात सदैव 6.6 के स्थिरांक पर आधारित माना जाता है। इसी प्रकार ग्रहपूर्ति यंत्र में भी आड़ी, ऊर्ध्व तथा तिरछी दिशाओं में अंकों की गणना स्थिर बनी रहती है और वही हमारा भाग्यांक माना जाता है। उन्होंने कहा कि गुरुत्वीय स्थिरांक सिद्धांत पर आधारित 16 घरों वाला यह भाग्यांक यंत्र जन्मतिथि के अनुसार आवश्यक अंकों का सही संतुलन और नियोजन करता है। इसमें मूल भाग्यांक को बदला नहीं जाता। इसकी विशेषता यह है कि मूल भाग्यांक वही बना रहता है, इसलिए अलग-अलग रेमेडीज़ की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाती है।
