मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का : अक्षय का सायबर संदेश

तड़का : अक्षय का सायबर संदेश

कविता श्रीवास्तव

बॉलीवुड के अभिनेता अक्षय कुमार की इस बात के लिए प्रशंसा की जानी चाहिए कि वे हमेशा आम आदमी बने रहते हैं। फिल्मी सितारों जैसे नखरेवाली बात उनमें नहीं देखी जाती है। महाराष्ट्र पुलिस द्वारा सायबर अपराध रोकने के लिए चलाए गए अभियान में अपनी बेटी की आपबीती उन्होंने सार्वजनिक रूप से शेयर की। उन्होंने बताया कि किस तरह उनकी बेटी ऑनलाइन गेमिंग के दौरान सायबर क्राइम का शिकार होने से बची। दरअसल, उनकी बेटी ने ऑनलाइन सायबर अपराध के प्रयास के पहले ही कदम पर अपनी मम्मी को सूचित कर दिया। उस बात को अपने तक सीमित नहीं रखा इसलिए वह बच गई। अपने घर की इस बात को अक्षय कुमार ने भी जनहित के लिए सार्वजनिक तौर पर शेयर किया। उन्होंने इस बात की चिंता नहीं की कि उनके जैसे प्रतिष्ठित परिवार की इस अंदरूनी बात के सार्वजनिक होने से क्या फर्क पड़ेगा। उन्होंने जनहित को ध्यान में रखते हुए यह संदेश दिया है कि सायबर अपराधियों का शिकार होने की बात छिपाएं नहीं। उसे पुलिस, परिवार, मित्रों सबके समक्ष लाएं। ऐसा करने से अपराधियों का शिकार होने से बचा जा सकता है। इस पर एक पुरानी कहावत याद आई, ‘बंद है मुट्ठी तो लाख की, खुल गई तो फिर खाक की।’ वैसे तो इस कहावत का एक अर्थ है एकता बनाए रखना। बंद मुट्ठी यानी एकता और मुट्ठी का खुलना यानी बिखर जाना। एकता में शक्ति होती है और बिखर जाने से शक्ति छिन्न-भिन्न हो जाती है। इस कहावत का दूसरा अर्थ है किसी बात के रहस्य को बनाए रखना। क्योंकि जब तक कोई बात छिपी हुई है उसे जानने की उत्सुकता होती है और बात का महत्व बना रहता है। उसके सार्वजनिक होते ही उसके प्रति लोगों की उत्सुकता समाप्त हो जाती है। उस बात का महत्व खत्म हो जाता है। इसीलिए किसी को उपहार भी छुपाकर ही दिए जाते हैं। इससे रिश्तों की गोपनीयता भी बनी रहती है। सामाजिक व्यवहार और निजी जीवन में कुछ बातों को गुप्त ही रखा जाता है। इससे विश्वास भी बना रहता है। इसी प्रकार यदि कुछ भेद न खुलें तो इज्जत बनी रहती है। लेकिन सायबर अपराधी आज इसी बात का फायदा उठा रहे हैं। ऑनलाइन लिंक पर लोगों को न्यूड फोटो शेयर करवाकर सायबर अपराधी अक्सर उन्हें अपने जाल में फंसा लेते हैं और इज्जत के डर से लोग शिकार बने रहते हैं। पुलिस प्रशासन, सामाजिक संस्थाएं व अन्य लोग इसी प्रयास में हैं कि लोग सायबर अपराध का शिकार होने पर इसके बारे में पुलिस को सूचना दें और जानकार लोगों की मदद लें। इससे सायबर अपराध को रोका जा सकेगा और शिकार बनने से बचा जा सकेगा। आज के डिजिटल और इंटरनेट युग में हम ऑनलाइन व्यवहार से बच नहीं सकते हैं। लेकिन सतर्क रहकर सायबर अपराध का शिकार होने से बच सकते हैं।

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