हनीफ जवेरी
जब अभिनेता या अभिनेत्रियां अभिनय की दुनिया में नए-नए आते हैं, तो उनके पास रोल चुनने का कोई विकल्प नहीं होता। जो भी भूमिका उन्हें मिलती है, वे उसे खुशी-खुशी स्वीकार करते हुए काम शुरू कर देते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उन्हें सफलता मिलती है, वे फिल्म चुनने के मामले में सावधानी बरतने लगते हैं। उनके लिए केवल भूमिका ही नहीं, बल्कि पूरी फिल्म और उसका माहौल देखना जरूरी हो जाता है। वे यह भी सोचते हैं कि वे किस निर्देशक और किस कलाकार के साथ काम करेंगे क्योंकि यह उनके करियर का सवाल होता है। कई बार किसी दूसरे कलाकार को ऊपर उठाने के लिए उन्हें समझौता करना पड़ता है और वो ऐसा कदम उठा लेते हैं, जो उनके करियर के लिए उचित नहीं होता।
अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने भी कई बार अपने करियर को लेकर ऐसा जोखिम उठाया है। माधुरी अपने करियर को लेकर इतनी सतर्क थीं कि उन्होंने सुभाष घई की फिल्म ‘कर्मा’ साइन तो कर ली, लेकिन जब उन्हें एहसास हुआ कि दिलीप कुमार और अन्य दिग्गज सितारों के बीच उनकी पहचान दब सकती है, तो उन्होंने तुरंत घई से मिलकर फिल्म ही छोड़ दी।
‘कर्मा’ जैसी बड़ी फिल्म, जिसे पाना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी बात थी, वह उन्होंने छोड़ दी। लेकिन मजबूरी में आगे चलकर उन्हें बकवास फिल्म ‘खिलाफ’ साइन करनी पड़ी। हुआ यूं कि पहले उनके सचिव राकेशनाथ ने हीरो चंकी पांडे का नाम सुनते ही फिल्म ठुकरा दी थी, क्योंकि तब तक माधुरी नंबर वन नायिका बन चुकी थीं और चंकी उनके सामने कुछ नहीं थे, ऊपर से जोड़ी के हिसाब से भी वो फिट नहीं थे। ये वही चंकी थे, जिन्होंने माधुरी की ही फिल्म ‘तेजाब’ में सेकंड लीड रोल किया था।
अब जब राकेशनाथ ने फिल्म अस्वीकार कर दी, तो चंकी की मां डॉ. स्नेहलता पांडे ने माधुरी से फोन पर विनती करते हुए कहा कि अगर वह उनके बेटे के साथ काम करेंगी तो उनके बेटे का करियर संवर जाएगा। पांडे परिवार से मित्रता होने के नाते माधुरी ने चंकी के साथ फिल्म ‘खिलाफ’ करना स्वीकार कर लिया, जबकि ऐसा करना किसी सफल अभिनेत्री के लिए आसान नहीं था।
अभिनेत्री श्रीदेवी ने अभिनेता मनोज कुमार के बेटे कुणाल गोस्वामी के साथ फिल्म ‘कलाकार’ में काम जरूर किया था, लेकिन उस असफल फिल्म के बाद उन्होंने न तो उनके साथ फिर काम किया और न ही कभी उस फिल्म का जिक्र किया। लेकिन फिल्म ‘खिलाफ’ के बाद एक बार फिर माधुरी असफल अभिनेता कुमार गौरव का करियर संवारने के लिए आगे आईं और उनके साथ फिल्म ‘फूल’ में काम करना स्वीकार किया।
कहा जाता है कि गौरव की एक के बाद एक फिल्में असफल होने के कारण उनके साथ पहले काम कर चुकीं पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने भी उनसे दूरी बना ली थी। ऐसे में उनके निर्माता पिता राजेंद्र कुमार स्वयं माधुरी से मिले और अपने बेटे के साथ फिल्म ‘फूल’ में काम करने का प्रस्ताव रखा।
सूत्रों के अनुसार, उनकी मजबूरी देखकर माधुरी के सचिव राकेशनाथ ने माधुरी की पारिश्रमिक राशि बढ़ा दी थी, परंतु राजेंद्र कुमार और सुनील दत्त का मान रखते हुए स्वयं माधुरी ने अपनी तय पारिश्रमिक राशि से भी कम में फिल्म ‘फूल’ करना मंजूर किया।
हो सकता है, बार-बार दूसरों के लिए समझौता कर माधुरी ने मन ही मन यह सोचा हो कि अब आगे वह किसी असफल अभिनेता को अपने नाम का सहारा नहीं देंगी। लेकिन परिस्थितियां उनके साथ ऐसी बनती रहीं कि नंबर एक पर होते हुए भी उन्हें असफल अभिनेताओं के साथ काम करते रहना पड़ा। जब अनिल कपूर के छोटे भाई संजय कपूर की पहली फिल्म ‘प्रेम’ असफल हुई, तो अनिल की खातिर माधुरी ने उनके साथ फिल्म ‘राजा’ की। मगर माधुरी का सहारा लेकर न तो चंकी और गौरव चले और न ही संजय कपूर।
