मुख्यपृष्ठस्तंभअवधी व्यंग्य : मउर के बन्हाई

अवधी व्यंग्य : मउर के बन्हाई

एड. राजीव मिश्र मुंबई
आज बुधई के बेटवा मनोहरा के बियाह है। बरात लालगंज से बदलापुर जाई। गाड़ी-घोड़ा, बर-बजनिया, आतिशबाज सहित डीजे सब के व्यवस्था खुद मनोहरा किये है। जेहिमा डीजे खोजय में पूरा कौशल लगाई दिहिस अउर जिला के सबसे बड़ा डीजे गोल्डेन म्यूजिक के बुक किहिस। बरात निकरय के बेला धीरे-धीरे नियराय रही है। दुलहा के गाड़ी सहित बरातिन्ह के गाड़ी भी सड़क पे पहुँचि चुकी हैं। पूरे गाँव में नेहछू घुमि गवा है। धीरे-धीरे गाँव के मेहरारू बुधई के घर की ओर पाँव बढ़ाई रही हैं। मनोहरा कपड़ा पहिन के चउके पर बैठि गवा है। गोड़ भराये के बाद मनोहरा के रज्जो बुआ काजर देवय आयी हैं। हाथ में कजरउटा लइके अपने भौजाई की ओर देखि रहीं हैं। का हो भउजी! बेटवा बियहत हऊ, नेग-जोग कहाँ हैं। मनोहरा के माई पर्स में से एक ठो चांदी के लरी अउर पाँच सौ के नोट निकारि के रज्जो के हाथ पे धइ दिहिन अउर कहिन, ल दीदी तुमहूँ का कहबू। का कहबय? बेटवा के बियाह में के चाँदी देत हय? अरे दीदी केतनी महंगाई है। बड़ी मुश्किल से तो दुलहिनी के मांगटीका बना है। तब तक मनोहरा के दादी बोली, ‘अरे गवहियाँ के बुलावा अउर मउर बन्हवाओ, चारि कोस के रस्ता है।’ खैर, मनोहरा के फूफा बरामद भये अउर पियरके फेटा से मउर बांधिके अपने बुधई की ओर देखय लगे, का हो बुधई बेटवा बियहत हय, लइ आओ सोने के अंगूठी। अइसा है गोबर्धन जवन मिलत है लेइ लो सोना के तो नामय जिनि लिहो। इतना कहिके एक हजार रुपिया गोबर्धन के जेबा में ठूंसी दिहेन। अब नम्बर आवा तिलक लगावे के, मनोहर के इकलउता जीजा सोहन कुमार बुलावा गएँ। अब उ तिलक से पहिले सोने के चैन पे अड़ी गए। तुम्हरे बियाह में दिल्ली से जहाज के सात हजार के जहाज के टिकट लिए, सूट सिलवाये, तीन हजार के गाड़ी कइके बारात जात हई और तुम फीरी फंड मा तिलक कराय लेइहौ? अइसा है सोहन, ई जहाज के किराया, कपड़ा-लत्ता अउर सोना-चाँदी सरकार बढ़ाईस है जाइके उही से सोने के चैन लेइ लो। उठ रे मनोहरा, सरकार पहिलय से सब कुछ लूटि लिहिस, अब इनका सोने के चैन कहाँ से लेइ आई। उठो, बिना तिलक के भी बियाह होत है।

अन्य समाचार