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काली दिवाली : एमपी में देसी बंदूक ने छीन ली २०० लोगों की आंखों की रोशनी!

इस बार की दिवाली भले ही कई लोगों के जीवन में ढेर सारी खुशियां लेकर आई हो लेकिन यह दिवाली कई लोगों को जिंदगी भर का गम देकर चली गई। और उनके लिए यह दिवाली काली साबित हुई। दरअसल, दीपावली की खुशियों के बीच भोपाल में एक सस्ता, लेकिन घातक नया `खिलौना’ कई परिवारों की दिवाली को काली कर गया। सिर्फ २०० रुपए की लागत वाली कैल्शियम कार्बाइड गन ने इस बार बच्चों और युवाओं की आंखों की रोशनी तक खतरे में डाल दी। अस्पतालों के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक २०० से ज्यादा लोग इस विस्फोटक जुगाड़ की चपेट में आ चुके हैं। इसमें अधिकांश मरीज ८ से १४ वर्ष के बीच के बच्चे हैं, लेकिन ७ साल से लेकर ३५ साल तक के वयस्क भी प्रभावित हुए हैं।
यह देसी गन गैस लाइटर, प्लास्टिक पाइप और आसानी से उपलब्ध वैâल्शियम कार्बाइड से सरल तरीके से बनाई जाती है। पाइप में भरा कैल्शियम कार्बाइड जब पानी से मिलता है तो एसिटिलीन गैस उत्पन्न होती है। एक छोटी सी चिंगारी मिलते ही तेज विस्फोट होता है और पाइप टूटने पर निकलने वाले प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़े, जैसे छर्रे, सीधे शरीर खासकर आंखों में घुसकर गंभीर चोटें करते हैं। अक्सर बच्चे जिज्ञासा में झांकते हैं और उसी क्षण धमाका हो जाता है, जिससे चेहरे, आंखों और कॉर्निया को गंभीर क्षति पहुंचती है। मरीजों की रिपोर्ट में बताया गया है कि सैकड़ों में से कुछ मरीजों के गंभीर डैमेज देखा गया है।

पटाखे फोड़ने पर गुस्साए शख्स ने बच्चों पर फेंका तेजाब
हरिद्वार के लक्सर में दिवाली की रात पटाखे जला रहे १०-१५ बच्चों पर गांव के ही एक व्यक्ति को इतना गुस्सा आ गया कि उसने अपनी छत से उन पर तेजाब जैसा कोई ज्वलनशील पदार्थ उड़ेल दिया। घटना में ५ बच्चे झुलस गए जिनमें एक की हालत गंभीर बताई जा रही है। गुस्साए लोगों ने आरोपी की पिटाई की।

आतिशबाजी से खिलवाड़ में गई युवक की जान
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर में स्टील के गिलास में बम रखकर फोड़ने से २० वर्षीय युवक की मौत हो गई है। पुलिस ने बताया कि जोरदार धमाके के बाद गिलास के चिथड़े उड़ गए और स्टील के टुकड़े उसके शरीर में कई जगह घुस गए थे। वहीं, मृतक युवक की पहचान शिव कुमार के रूप में हुई है।

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