मुख्यपृष्ठनए समाचारसंपादकीय : राज फडणवीस का; घोटाले विपक्ष के!

संपादकीय : राज फडणवीस का; घोटाले विपक्ष के!

मुख्यमंत्री फडणवीस ने चेतावनी दी है कि वे विपक्ष के घोटालों का पर्दाफाश करेंगे। यह घोटाला मतदाता सूची से संबंधित है। मतदाता सूची में हुए घोटालों से विपक्षी दलों के लोगों को वैâसे फायदा हुआ इसका खुलासा किया जाएगा, इस तरह का खीज भरा बयान ऐन दिवाली के मौके पर मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा देना ठीक नहीं है। इसका मतलब यह है कि राज्य में विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ छेड़े गए अभियान और उससे निकले घोटालों की बमबारी फडणवीस के मर्मस्थल पर हुई है। फडणवीस का घोटालों पर बात करना एक मजाक है। चुनावों में भाजपा और उसके लोगों का भ्रष्टाचार बार-बार सामने आया है। चुनाव आयोग उनके कदमों पर है। जिला स्तर के चुनाव निर्णय अधिकारी उनके हैं। मतदाता सूची में नाम डालने और हटाने की सारी मशीनरी फडणवीस कंपनी के हाथों में है। जब चुनाव आयोग सरकार के दरबार में पानी भरने का काम कर रहा हो तो ‘चुनावी घोटाले से विपक्ष को फायदा हुआ’ जैसा बयान देने पर क्या कहा जा सकता है? दो दिन पहले, वरिष्ठ कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात ने कहा था कि उनके संगमनेर निर्वाचन क्षेत्र में लगभग साढ़े नौ हजार बोगस मतदाता हैं। अधिकारियों ने बिना जांच-पड़ताल किए ही इन नामों को मतदाता सूची में शामिल करने की जल्दबाजी की, क्योंकि सरकार थोरात को हराना चाहती थी। इनमें से कई मतदाताओं के पते निर्वाचन क्षेत्र से बाहर के हैं। इस हिसाब से देखें तो यह दावा कि सूची घोटाले से विपक्ष को फायदा हुआ, बकवास है। संगमनेर में साढ़े नौ हजार
मतदाता बोगस
निकले और बालासाहेब थोरात इतने ही मतों से हार गए थे। सत्ताधारियों को विपक्ष को मूर्ख नहीं समझना चाहिए। यशवंतराव चव्हाण जैसे सूर्य के साथ काम कर चुके विपक्षियों की पीढ़ी आज भी महाराष्ट्र की राजनीति में है। आज उन्हें फडणवीस जैसे लोगों से ये अकल के सबक सीखने पड़ रहे हैं। श्री फडणवीस हाल में घोटालों के बारे में ज्यादा ही बोलने लगे हैं। इंदिरा गांधी के वक्त में गांधी ने बीस सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की थी। यह विकास का एक सुनियोजित कार्यक्रम था। दादा कोंडके ने इस पर ‘गंगाराम वीस कलमे’ नामक एक हास्य फिल्म बनाई थी। इसी तरह राज्य के संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘फडणवीस वीस कलमे’ नामक फिल्म बनाने पर कोई आपत्ति नहीं है। फडणवीस पिछले बीस घंटों में विपक्षी दलों के घोटालों के बारे में बीस बार बात कर चुके हैं। दरअसल, फडणवीस का यह कहना कि ऐसा घोटाला हुआ और विपक्ष को भी इसका फायदा हुआ, इसका मतलब है कि उनकी यह स्वीकारोक्ति ही है कि चुनाव प्रणाली और मतदाता सूचियों में बहुत बड़ा घोटाला चल रहा है। फडणवीस ने दिवाली के मौके पर ‘वर्षा’ बंगले के लॉन में पत्रकारों को ‘खाना’ दिया। उनकी सरकार द्वारा किए जा रहे घोटालों को ज्यादा प्रचार न मिले और मामले वहीं दबा दिए जाएं इसलिए फडणवीस सरकार कई तरीके अपनाती रहती है। और फिर, ये विपक्ष के
‘सो -कॉल्ड’ घोटालों पर
बोलेंगे। पुणे के जैन ट्रस्ट का जमीन घोटाला साढ़े तीन हजार करोड़ का है। अगर विपक्षी दलों के लोग इसमें शामिल हैं तो फडणवीस को वह बताना चाहिए। इस जैन ट्रस्ट जमीन घोटाले के तार मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गए हैं। पुणे का जैन समाज जमीन घोटाले पर फडणवीस से जवाब मांग रहा है और फडणवीस विपक्षी दलों पर उंगली उठा रहे हैं। असल में फडणवीस की सरकार और उनकी कार्यप्रणाली ही एक महा घोटाला है। ‘मुख्यमंत्री लाडली बहन’ योजना में घोटाले के नए सबूत सामने आए हैं। फडणवीस और अन्य लोग हमेशा कहते हैं कि ‘लाडली बहन’ योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन वास्तव में यह केवल १,५०० रुपए में महिलाओं के वोट खरीदने का एक उद्योग है। इस योजना का लाभ १२,४३१ पुरुषों ने उठाया। इन पुरुषों ने साल भर १,५०० रुपए मासिक लिए, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि एक लाख अपात्र महिलाओं ने ‘लाडली बहन’ योजना का लाभ उठाया। अपात्र लाभार्थियों के खातों में १६४.२० करोड़ रुपए जमा करनेवाली सरकार इस घोटाले को नहीं रोक पाई। पुरुषों ने ‘बहनों’ के पैसे का गबन कर लिया। उस लूट की रकम लगभग पच्चीस करोड़ रुपये के करीब है। यह शिंदे, फडणवीस आदि की मिलीभगत से किया गया घोटाला है और ये लोग विपक्ष के घोटाले को उजागर करने की धमकी दे रहे हैं। खुद किए गए घोटाले का ठीकरा विपक्ष के सिर पर फोड़ना लोकद्रोह है। लोकद्रोह की भी अपनी मर्यादा होती है और उसकी सजा भी मिलती जरूर है। सरकार फडणवीस की है और घोटाले विपक्ष कर रहा है तो मुख्यमंत्री क्या कर रहे हैं? इस्तीफा दें और संघ कार्यालय में जाकर बैठ जाएं, हम बस इतना ही कह सकते हैं।

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