नवीन सी. चतुर्वेदी
घुटरू बड़ौ ही पुरानों गीत गाय रह्यौ है! क्या बात है कछू खास बात है का?
खास बात कछू नाँय बत्तो बस ऐसें ही अचानक मूड सौ बन गयौ। अपनी किसम कौ अलग्ग ही गीत है यै। अमिताभ बच्चन और परवीन बॉबी की फिलम आयी हुती ‘खुद्दार’ १९८२ में। वा फिलम के लिएं या गाने कों मजरूह सुल्तानपुरी साब नें लिख्यौ हुतो। राजेश रौशन साब की बनाई धुन पै या गीत कों गायौ हुतो किशोर दा और लता दीदी नें।
हाँ घुटरू, ब्याउ बरात’न में हर जगें यै ही गीत बजौ करतो। का छोरा छापरे और का छोरी छापरीं सब या गीत कों गाउ करते। यै चौरी-चौरी मौरी वारी बैल बॉटम’न की पैâसन हुती विन दिन’न। छोरी हू बैल बॉटम पै फिटिंग वारे टॉप पहनों करतीं।
और बत्तो या एक ही गीत में तीन अन्य भारतीय भाषा’न कों समेट लियौ गयौ। गुजराती, पंजाबी, बंगाली भाषा में ‘आय लव यू’ वैâसें कहें वौ एक झटका में सीख गये सब लोग। क्या जमानों हुतो सिगरी भाषा अपनी भाषा लगौ करतीं अब तौ भाषा’न के नाम पै महाभारत मचे भए हैं।
हाँ घुटरू, ये तीन शब्द बड़े ही कमाल के हैं। इनकौ जादू हर युग में सिर चढ़ कें बोलै। ऐसौ नाँय नें कि ये शब्द केवल प्रेमी-प्रेमिका ही एक-दूसरे सों कह सकें। ‘आय लव यू’ यानि मैं तुमसे प्यार करता हूँ यै तौ कोउ भी काहू सों भी कह सवैâ। मैया-बाप अपने बालक’न सों कह सकें। ग्रैंड चिन्ड्रेन्स ग्रैंड पेरेंट्स सों कह सकें। टीचर स्टूडेंट एक-दूसरे सों कह सकें। यार-दोस्त तौ आपस में कहें ही हैं।
बत्तो इतनों ही नाँय आय लव पनीर, आय लव समोसा, आय लव कश्मीर, आय लव ढाका दी मलमल, आय लव किशोर दा जैसे जुमला खूब पढ़े और सुने हैं, बल्कि कभू-कभू बोले हु हैं।
हाँ घुटरू, मुम्बई में तौ कछू बरस’न सों यै पैâसन जादा ही चल रही है जैसें कि आय लव मुम्बई, आय लव कांदिवली, आय लव ठाकुर विलेज आदि आदि। मगर अंधी पैâसन हमें दिशा सों भटकाय देवै है। हमनें आय लव यू फलाना-ढिकाना सड़क’न पै लिखवौ तौ सुरु कर दियौ मगर युग युगान्तर’न सों जो आय लव यू हमारे करेजे’न पै लिखौ भयौ हुतो वाकों मिटाय डारौ। फिर जो होनों हुतो है कें रह्यौ। भावना हृदय की विषयवस्तु है, सड़क’न की नाँय-
डरते-डरते प्रीत ने, पुन: पसारे पाँव
नफरत ने फिर से मगर, खेल दिया है दाँव
