भाजपा नेता और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी हमारी निगरानी में हैं। बावनकुले ने बिना किसी तरह की पर्दादारी करते हुए इस निगरानी का मतलब समझाया। भंडारा में एक कार्यक्रम में उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से कहा, ‘हमने आपके सभी मोबाइल फोन और व्हॉट्सऐप ग्रुप को ‘सर्विलांस’ पर रख दिया है। आप व्हॉट्सऐप पर किससे बात करते हैं, क्या कहते हैं, ग्रुप में हर दिन क्या मैसेज भेजते हैं, इसका पूरा डिजिटल रिकॉर्ड रोज हमारे पास आता है इसलिए कोई भी ज्यादा होशियारी न करे। हम आप पर नजर रख रहे हैं।’ बावनकुले की यह धमकी सिर्फ उनके पदाधिकारियों के लिए ही नहीं, बल्कि राज्य में विपक्षी दल और देवेंद्र फडणवीस की पार्टी के भीतर विरोधियों के लिए भी है। बावनकुले ने एक तरह से बम फोड़ दिया है। इससे एक बात तो साफ हो गई कि फडणवीस और उनके लोगों ने महाराष्ट्र में ‘पेगासस’ जैसा एक निजी सिस्टम बना लिया है और अपने सभी विरोधियों के कॉल, चैटिंग और ई-मेल सुन या देख रहे हैं। २०१९ के दौरान, जब भाजपा की सरकार नहीं बन रही थी, राज्य के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक विपक्षी दल के नेताओं के फोन ‘टैप’ करके और विपक्षी खेमे में क्या चल रहा है, इसकी जानकारी फडणवीस को देने का काम करते थे। आपत्ति जताए जाने के बाद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई, लेकिन जैसे ही फडणवीस दोबारा सत्ता में आए, विपक्ष के फोन चोरी से सुनने वाले पुलिस महानिदेशक को
क्लीन चिट
दे दी गई। अब भी शख्स पुलिस महानिदेशक के पद पर है और राज्य के एक प्रमुख मंत्री ने कबूल किया है कि विरोधियों के फोन टैप किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से फोन टैप करना अलग बात है और किसी राजनीतिक दल द्वारा निगरानी के लिए फोन टैप करने हेतु एक अलग निजी प्रणाली स्थापित करना अलग बात है। अगर भाजपा ने कम से कम ८०० से १००० करोड़ रुपए खर्च करके मुंबई, पुणे, नागपुर में ऐसे ‘पेगासस’ गुप्त ऑपरेशन केंद्र स्थापित किए हैं, तो चंद्रशेखर बावनकुले का अनजाने में इस जाल को तोड़ने के लिए नागरिक सत्कार किया जाना चाहिए। अगर भाजपा के भीतर उन लोगों के फोन टैप किए जा रहे हैं, जो फडणवीस के गुट से नहीं हैं तो विपक्षी दल, शिंदे गुट के नेता भी इस फोन टैपिंग के दायरे में आएंगे ही। फोन टैपिंग एक गंभीर अपराध है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसे अपराधों को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। इंडिया टेलीग्राफ एक्ट, १८८५ के अनुसार, सरकार कुछ विशेष परिस्थितियों में फोन टैप कर सकती है। इस विशिष्ट परिस्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने पर और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कानूनी तरीकों का पालन करके फोन टैपिंग की जा सकती है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति या अधिकारी अवैध रूप से फोन टैप करता है तो अपराधियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा ४०९, ४१९, ४२०, ४६६, ४६८, ४७१ और ५०० के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। अवैध रूप से फोन टैप करके
किसी की निगरानी
करना और उसके जरिए गुप्त जानकारी प्राप्त करना एक गंभीर मामला है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद २१ प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्र जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (राइट टू प्राइवेसी) का अधिकार देता है इसलिए उनके फोन की निगरानी करना, उनकी निजी बातचीत को टैप करना, व्यक्तिगत गोपनीयता का उल्लंघन है। यह एक तरह से अवैध नजरबंदी है और भाजपा ने ऐसे डिजिटल पिंजरे बनाकर अपने विरोधियों को एक तरह से ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया है। मंत्री बावनकुले ‘टीम देवेंद्र’ के एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं इसलिए फोन टैपिंग के संबंध में उनके बयान को यूं ही नहीं छोड़ा जा सकता। देवेंद्र ने पार्टी के भीतर और भी अधिक दुश्मन बना लिए हैं। फडणवीस गृह मंत्री अमित शाह की ‘गुड बुक’ में नहीं हैं इसलिए जिनके फोन ‘टैप’ किए जा रहे हैं। क्या अमित शाह का नाम उन लोगों की सूची में है? यह सवाल है। आशीष शेलार, सुधीर मुनगंटीवार जैसे नेताओं को अधिक सावधान रहना चाहिए। राज्य में इस समय ‘शांत, फोन टैप हो रहे हैं’ का नाटक चल रहा है। महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के फोन निजी तौर पर टैप किए जा रहे हैं तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है, लेकिन अगर फोन टैपिंग के जरिए भाजपा के लोगों को ही नजरबंद किया जा रहा है तो मान लेना चाहिए कि तानाशाह डर गया है। ये महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के दशावतार हैं। महाराष्ट्र हर तरह की अवैध गतिविधियों और घोटालों का अड्डा बन गया है। गुजरात में फर्जी अदालतें, फर्जी ईडी, फर्जी सीबीआई टीमें बन गर्इं। तो महाराष्ट्र कैसे पीछे रह सकता है? वह गुजरात से आगे निकल गया है। चंद्रशेखर बावनकुले के खिलाफ इंडिया टेलीग्राफ एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई होनी ही चाहिए।
