-शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी
-१९ स्टेशनों पर रिकॉर्डतोड़ पीएम २.५ स्तर दर्ज,
-सात पर रिकॉर्ड पीएम १०
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में इस साल अक्टूबर महीना सांसों का दुश्मन बन गया है। शहर की हवा में अब ऑक्सीजन से ज्यादा धूल और जहरीले कण तैर रहे हैं। ऊर्जा व स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में मुंबई के १९ निगरानी केंद्रों ने पीएम २.५ का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर, जबकि सात केंद्रों ने पीएम १० का रिकॉर्ड स्तर दर्ज किया है।
त्योहारों के मौसम के दौरान १८ से २२ अक्टूबर के बीच प्रदूषण ने नए रिकॉर्ड बनाए, जिससे साफ है कि मुंबई की हवा अब सांस के बजाय खतरा बन चुकी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्थिति सिर्फ मौसमी नहीं है, बल्कि मनपा की लापरवाही, निर्माण स्थलों की धूल, ट्रैफिक उत्सर्जन और कचरा जलाने जैसी गतिविधियों ने हवा को जहर बना दिया है। मुंबई की हवा में लगातार बढ़ते पीएम २.५ ने फेफड़ों, दिल और बच्चे-बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर सीधा हमला किया है। ऐसे में यदि जल्द ही इसे नियंत्रण में नहीं लगाया गया तो शहर के लिए सांस लेना ही सबसे बड़ा जोखिम बन जाएगा।
अक्टूबर सबसे प्रदूषित महीना
अक्टूबर २०२५ मुंबई के लिए इस साल का सबसे प्रदूषित महीना साबित हुआ है। शहर के १९ निगरानी केंद्रों ने जनवरी के बाद अपने सबसे ऊंचे दैनिक पीएम २.५ स्तर दर्ज किए, जबकि सात केंद्रों पर पीएम १० का स्तर भी चरम पर पहुंचा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों से पता चलता है कि यह प्रदूषण १८ से २२ अक्टूबर के बीच तेजी से तब बढ़ा जब शहर त्योहारों के उत्सव में व्यस्त था।
भारी ट्रैफिक और वाहनों का धुआं बढ़ा रहा प्रदूषण!
मनोज कुमार ने कहा है कि वायु प्रदूषण से निपटने की हर नीति के केंद्र में जन स्वास्थ्य की सुरक्षा होनी चाहिए। मुंबई की हवा में पैâले सूक्ष्म कण पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम ही प्रदूषण के मुख्य कारण हैं। पीएम २.५ बेहद सूक्ष्म कण हैं, जो फेफड़ों से होकर रक्त में प्रवेश कर सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, ये कण हृदयाघात, स्ट्रोक और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं। इसी तरह पीएम १० मोटे धूलकण हैं, जो सड़कों और निर्माण कार्यों से निकलते हैं। ये श्वसन तंत्र में जमकर खांसी, अस्थमा और एलर्जी जैसी समस्याएं पैदा करते हैं।
स्वास्थ्य पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि पीएम २.५ और पीएम १० की लगातार ऊंची सांद्रता बच्चों, बुजुर्गों और पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य खतरा है। लंबे समय तक इन कणों के संपर्क में रहने से श्वसन और हृदय रोगों के साथ वैंâसर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण
मुंबई में प्रदूषण के मुख्य कारण त्योहारों के दौरान पटाखों का धुआं, बढ़ा ट्रैफिक और वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण स्थलों की धूल स्थिर मौसम और हवा की कम गति है। इससे अक्टूबर महीने में प्रदूषण अपने चरम पर पहुंच गया।
साफ है चेतावनी साफ
मुंबई की हवा धीरे-धीरे जहरीली होती जा रही है। विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जल्द ही मुंबई भी दिल्ली जैसे प्रदूषण की गिरफ्त में आ सकती है।
