-वन्यजीव तस्करी का हुआ भंडाफोड़
-एनाकोंडा समेत कई दुर्लभ प्रजातियां शामिल
सामना संवाददाता / मुंबई
एक बार फिर मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हड़कंप मच गया। एक महिला यात्री के पास से चार ऐनाकोंडा सहित १५४ वन्यजीव जब्त किए गए। महिला यात्री ठाणे की रहने वाली है। अक्टूबर महीने में चौथी बार दुर्लभ वन्यजीव तस्करी का मामला सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अक्टूबर २०२५ में, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वन्यजीव तस्करी के कम से कम चार मामले सामने आए हैं। इन मामलों में कई विदेशी और दुर्लभ प्रजातियों के वन्यजीवों को जब्त किया गया।
१५४ विदेशी जानवर जब्त
२३ अक्टूबर, को एक महिला यात्री के पास से १५४ विदेशी जानवर, जिनमें एनाकोंडा के चार बच्चे भी शामिल थे। थाने की रहने वाली यह महिला यात्री बैंकॉक से आ रही थी। जांच में पता चला कि महिला के सामान में एनाकोंडा, इगुआना, कछुआ, छिपकली और रैकून जैसी विदेशी प्रजातियां छिपाई गई थीं। अधिकारियों ने बताया कि महिला की गतिविधियां हवाई अड्डे पर संदिग्ध लगीं, जिसके बाद उसे रोका गया और उसके सामान की तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान पाए गए सभी जानवर सुरक्षित और जीवित थे। बचाए गए जानवरों को रेस्क्यूइंग एसोसिएशन फॉर वाइल्डलाइफ वेलफेयर को सौंपा गया है, जहां उनका मेडिकल परीक्षण और पुनर्वास किया जाएगा।
६० से ज्यादा तस्करी के मामले उजागर
गौरतलब है कि ११ अक्टूबर, बैंकॉक से आए एक यात्री द्वारा ६० से ज्यादा विदेशी वन्यजीवों की तस्करी का मामला सामने आया। इन जानवरों में मेंढक, टैरेंटुला, कछुए और कई प्रकार की छिपकलियां शामिल थीं। अक्टूबर ८-११, इस अवधि के दौरान एक वन्यजीव तस्करी का मामला दर्ज किया गया, जिसमें नशीले पदार्थों की तस्करी भी शामिल थी। अधिकारियों ने कई विदेशी जानवर बरामद किए। जबकि ५ अक्टूबर को बैंकॉक से आए एक यात्री के सामान से ३६ विदेशी जानवर जब्त किए गए। इन जानवरों में गिलहरी बंदर, रैकून और छिपकलियों की विभिन्न प्रजातियां शामिल थीं। बताया जाता हैं कि कुछ समय से लोगों में दुर्लभ वन्यजीव पालने का शौक तेजी से बढ़ा है जिसके कारण इन जानवरों की तस्करी का कारोबार फल-फूल रहा है।
वन्यजीव तस्करी की बड़ी साजिश
सीमा शुल्क अधिकारियों ने पुष्टि की कि जब्त जानवरों में से कई लुप्तप्राय और संरक्षित प्रजातियों के अंतर्गत आते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह घटना वन्यजीव तस्करी की बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकती है और मामले की गहन जांच जारी है। महिला के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, १९७२ और सीमा शुल्क अधिनियम, १९६२ के तहत मामला दर्ज किया गया है।
