मुख्यपृष्ठसमाचारमनमानी कीमतों पर परोसी जा रही थालियों में दूषित भोजन, यही है...

मनमानी कीमतों पर परोसी जा रही थालियों में दूषित भोजन, यही है ढाबों की हकीकत

– स्वास्थ्य व खाद्य सुरक्षा विभाग की चुप्पी संदेह व सवालों के घेरे में
राजेश सरकार
प्रयागराज। शहर से लगे नैनी, झूंसी, फाफामऊ में हाइवे पर मौजूद ढाबों में मनमानी कीमतों पर परोसी जाने वाली थालियों में दूषित भोजन परोसे जाने के मामले आए दिन सामने आते रहे हैं। फिर भी इनपर नियंत्रण रखने वाले स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों की चुप्पी सवालों के घेरे में हैं। नैनी-मिर्जापुर और रीवारोड (हाइवे) पर कई ढाबों पर दूषित भोजन परोसे जाने के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं, जो स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी एक गंभीर समस्या है। नैनी, करछना, सिरसा, मेजा, कोरांव, घूरपुर, जारी, शंकरगढ़ के कई ढाबों पर खराब खाने की शिकायतें दर्ज भी की गई हैं। कई ढाबे साफ़-सफाई के मानकों का पालन नहीं करते, जिससे ग्राहकों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। योगी सरकार ने सितंबर 2024 में खाद्य पदार्थों में मिलावट और गंदगी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। यह कार्रवाई खास तौर पर उन ढाबों और होटलों पर केंद्रित थी, जो सफाई नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। लेकिन स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण की शिथिलता से ढाबों पर सरकार की सख्ती का असर नहीं पड़ा। बता दें कि प्रयागराज में ढाबों पर स्वास्थ्य से खिलवाड़ के मामले अगस्त 2025 में सामने आए थे। गंगापार क्षेत्र के ढाबों और रेस्टोरेंट में गंदगी से बीमारियों का खतरा बढ़ने की खबर आई। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि इन जगहों पर सफाई के मानकों की अनदेखी की जा रही है। यमुनापार क्षेत्र के ढाबों में भी साफ-सफाई का अभाव और मिलावटी खाद्य सामाग्रियों से तैयार भोजन परोसे जाने से लोगों को पेट सम्बंधी गंभीर बीमारियां घेरे हुए हैं।

 शराब पीने के लिए ढाबों में होती है भीड़
नैनी, झूंसी और फाफामऊ के हाइवे पर खुले ज्यादातर ढाबों पर शराब पीने की खुफिया व्यवस्था किए जाने से पीने वालों की रात में जबरदस्त भीड़ लगती है। ढाबों पर समय की पाबंदी होने के बाद भी देर रात दो बजे तक अनाप-शनाप खाना परोसा जाता है। पीने वालों को जब खराब भोजन का पता चलता है तो देर रात तक ऐसे ढाबों पर गाली-ग्लौज, मारपीट और फायरिंग के मामले अक्सर होते रहते हैं। नैनी के मेवालाल बगिया चौराहा पर मौजूद वर्षों पुराने ढाबे, सब्जीमंडी नैनी पेट्रोल पम्प के बगल स्थित नॉनवेज ढाबे पर अक्सर खाने को लेकर हंगामा, मारपीट और फायरिंग की घटना सामने आई हैं। यहां ज्यादातर पुराने हिस्ट्रीशीटर, भूमाफिया, छिनैती करने वाले, अपराध में लिप्त लोग देर रात तक पीने के बाद ढाबों पर खाना खाते हैं। इस दौरान खाने में कमियां मिलने पर जमकर बवाल करते हैं। मेवालाल बगिया चौराहे पर स्थित बदनाम ढाबे में वर्ष 2024 में एक वकील को बाहर निकलने पर अपराधियों ने जमकर मारापीटा था। इस ढाबे में वर्ष 2013-14 के दौरान एक नौकर की गोली लगने से मौत भी हो चुकी है। मिर्जापुर मार्ग स्थित टीएसएल रेलवे क्रासिंग के पास खुले बदनाम ढाबों में भी भोजन में कमी पाए जाने पर शराबियों की जमात आए दिन अराजकता फैलाए रहती है। नैनी-मिर्जापुर (हाइवे) मार्ग पर ज्यादतर ढाबों में हंगामा और मारपीट के मामले आए दिन सामने आते हैं। मध्य प्रदेश को जाने वाले रीवा राजमार्ग पर कुछ ऐसे ढाबे हैं जहां स्वास्थ्य सम्बंधी मानको की अनदेखी कर मिलावटी खाद्य और मसालों से भोजन बनाया जाता है। इन ढाबों पर देर रात तक भीड़ लगी रहती है जिनमें आपराधिक गतिविधि वाले लोग ज्यादा शामिल रहते हैं। अक्सर यहां पीने-पिलाने के दौर के बाद भोजन को लेकर हंगामा होता रहता है। मनमाने कीमत में दी जाने वाली थालियों पर लोगों को जहरीला भोजन परोसा जाता है।

शिकायत दर्ज कराने के तरीके
अगर आप किसी ढाबे में दूषित या खराब खाना पाते हैं, तो आप इसकी शिकायत कई तरीकों से कर सकते हैंः सर्वप्रथम शिकायत पोर्टल भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के शिकायत पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। मोबाइल ऐप ’फूड सेफ्टी कनेक्ट’ ऐप के जरिए भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है। टोल-फ्री नंबर 1800112100 पर भी शिकायत की जा सकती है। राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण से भी संपर्क कर सकते हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद एक टिकट नंबर दिया जाता है, जिससे आप अपनी शिकायत की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं।

लोगों का कहना है
नैनी के स्थानीय निवासी रामप्रताप, शिवपूजन, रामकुमार, मनोज सिंह, आदि का कहना है कि फुटपाथ किनारे और मेवालाल बगिया जैसे व्यस्त चौराहे के पास स्थित ढाबों पर तेल, वनस्पति, आटा, सब्जियां, मक्खन आदि मिलावटी होते हैं। दोयम दर्जे के खाद्य पदार्थों के अलावा सब्जीमंडियों से बची हुई सड़ी-गली सब्जियों का ढाबे में इस्तेमाल किया जाता है। इन ढाबों पर रसोई में साफ-सफाई का बिलकुल ध्यान नहीं रखा जाता है। इसके अलावा आटे की बोरियां, सब्जी एवं अन्य सामाग्रियां खुली हुई रखी जाती हैं। ऐसे में छिपकली आदि जहरीले कीड़े आदि इनमें घुस जाती हैं और उसी में मर जाती हैं जिससे भोजन विषाक्त हो जाता है।

अन्य समाचार