कुछ तसल्लियां मन को देनी पड़ती हैं
नहीं तो जीना मुहाल हो जाए
कुछ तल्खियां सहनी पड़ती हैं
कहीं जिंदगी बेजार न हो जाए
जो हिदायतें दी गईं मुझको सब निभाई मेैंने
कहीं तेरे कूचे में आना दुश्वार न हो जाए
सभी रस्मों-रिवाजों को निभाता रहा हूं मैं
कुछ आसानी से जिंदगी गुजर कर ली होती मैंने
मेरे शौक कुछ अलग से थे दोस्तों
करीने से उन्हें नकारता रहा हूं मैं
जिस घड़ी सामना हुआ था तुझसे
बग़ावत अपने से कर ली मैंने
तू न रहे मायूस यही दुआ थी मेरी
पास रह कर भी तू हुई न थी मेरी
जानता था कि इश्क दरिया है आग का
हिम्मते मर्दा कदम बढ़ा ही लिए जब
जल कर राख होना किस्मत थी मेरी।
-बेला विरदी
