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मुंबई की सड़कों से बेस्ट बसें रिटायर… केवल ३०८ स्व-स्वामित्व वाली बसें बचीं

सामना संवाददाता / मुंबई

पिछले कुछ दिनों में बेस्ट के स्व-स्वामित्व वाले बस बेड़े में शामिल कई बसें रिटायर हो गई हैं। अब इस बेड़े में केवल ३०८ स्व-स्वामित्व वाली बसें ही बची हैं क्योंकि नई बसों को शामिल नहीं किया जा रहा है। हाल ही में आखिरी जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) बस को रिटायर किया गया। इसके विदाई समारोह का आयोजन ‘आपली बेस्ट आपल्याचसाठीr संगठन’ द्वारा किया गया।
मुंबई की जान
बेस्ट बसें मुंबई की सड़कों की जान मानी जाती हैं क्योंकि ये सस्ती, तेज और आरामदायक यात्रा प्रदान करती हैं। रोजाना लगभग ३० लाख यात्री इन बसों का उपयोग करते हैं। लेकिन स्व-स्वामित्व वाली बसों की संख्या घटने के कारण कुल बेड़े में केवल ११.६३ प्रतिशत बसें ही स्व-स्वामित्व वाली हैं, जबकि ८८.३७ प्रतिशत बसें निजी कंपनियों की हैं। निजी बसों के रखरखाव में कमी के कारण चालक और यात्री परेशान हैं। इस स्थिति में स्व-स्वामित्व वाली बसों की संख्या बढ़ाने के लिए अभियान चलाने की योजना है।
२००९ में जेएनएनयूआरएम के तहत बेस्ट बेड़े में ७५० अशोक लेलैंड बसें शामिल की गई थीं। पंद्रह सालों तक यह बसें मुंबई के यातायात में सक्रिय रही और लाखों यात्रियों को सुरक्षित सेवा दी। अक्टूबर में कई जेएनएनयूआरएम बसें रिटायर हुर्इं, जिनमें अंतिम बड़ी बस संख्या १८६४ (एमएच ०१ एपी ०७४८) भी शामिल थी। विदाई समारोह में बस को फूल, माला और गुब्बारों से सजाया गया, मूल रंग पुन: किया गया और रूट संख्या के साथ इंजीनियर सुहास पेडणेकर ने बेड़े का क्रमांक अंकित किया।

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