`अगर स्थानीय लोगों को बेदखल करने की कोशिश की गई तो उनके स्वर्ण महल टिक नहीं पाएंगे। यह लड़ाई मुंबई की है। मतदाता सूची में घोटाले शुरू हो चुके हैं और शिवसेना कौरवों के खिलाफ पांडवों की भूमिका में लड़ेगी।’
सामना संवाददाता / मुंबई
मोदी और शाह के सौ बाप नीचे उतर आएं, तो भी शिवसेना हमारी ही रहेगी। ट्रंप को नींद में भी पूछो कि शिवसेना किसकी है, तो वह भी बताएगा कि शिवसेना किसकी है। लेकिन चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट अब तक नहीं बता पा रहे हैंै कि आखिरकार शिवसेना किसकी है। इस तरह का जोरदार प्रहार करते हुए शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत ने कहा कि अगर स्थानीय लोगों को बेदखल करने की कोशिश की गई तो उनके स्वर्ण महल टिक नहीं पाएंगे। यह लड़ाई मुंबई की है। उन्होंने घोषणा करते हुए यह भी कहा कि मतदाता सूची में घोटाले शुरू हो चुके हैं और शिवसेना कौरवों के खिलाफ पांडवों की भूमिका में लड़ेगी।
शिवसेना के संकल्प सम्मेलन के दौरान सांसद संजय राऊत ने भाजपा पर जोरदार हमला बोला। संजय राऊत ने महायुति सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सरकार में सिर्फ दो उप मुख्यमंत्री हैं, लेकिन हमारे पास आज यहां पांच हजार उप शाखाप्रमुख मौजूद हैं। अगर ये एक बार संकल्प ले लें, तो उन्हें परास्त किए बिना नहीं रहेंगे। शिवसेना को संघर्ष किए बिना कुछ नहीं मिला है, जबकि घाती को सब कुछ तैयार मिला है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सैनिक आखिरी सांस तक लड़ता है, उसी तरह का संघर्ष शिवसेना के उप शाखाप्रमुख भी करते हैं।
कश्मीर-मणिपुर जल रहा है
अमित शाह को लेकर उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के स्वागत होर्डिंग पर सफल गृह मंत्री लिखा गया था। इस पर उन्होंने सवाल पूछा कि यह कौन-सी सफलता है? क्या पहलगाम में २६ महिलाओं की मांग का सिंदूर मिट गया और आतंकवादी भाग निकले, यही तुम्हारी सफलता है? आज भी कश्मीर और मणिपुर जल रहा है और ये देश के गृह मंत्री को सफल कह रहे हैं। यह सफल गृह मंत्री मुंबई आए। ये क्यों आए? उन्होंने कहा कि भाजपा का चौपाटी पर कार्यालय, टॉवर अवैध जमीन पर है। इसलिए हमारे विधायकों को यह मामला विधानसभा में उठाना चाहिए।
संघर्ष से हुआ हमारा जन्म
संजय राऊत ने कहा कि शिवसेना को आसानी से कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि हम विष्णु के अवतार नहीं हैं। हम इंसान हैं, पर हमारा जन्म आग में तपकर, फौलाद से और भट्ठी के बीच संघर्ष से हुआ। अनगिनत बार हम बाहर निकले और ऐसे अनगिनत प्रसंग हमने अपनी जिंदगी में देखे। संजय राऊत ने कहा कि हम महाराष्ट्र में किसी की बैसाखी पर नहीं हैं। हमने आपको बैसाखी दी, इसलिए वहां तक पहुंचे।
मुंबई पर फिर से वक्र दृष्टि
संजय राऊत ने कहा कि एक बार फिर से इस मुंबई पर वक्र दृष्टि टिकी हुई है। फिर से इस मुंबई को निगलने की कोशिश हो रही है। इन तूफानों से हमें इस मुंबई को बाहर निकालना होगा। आपके कितने भी कौरव हमारे सामने आ जाएं, लेकिन हम उनके सीने पर पैर रखकर खड़े रहेंगे और इस मुंबई की लड़ाई को हम जीतेंगे। संजय राऊत ने कहा कि शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में हम इस मुंबई पर भगवा झंडा फहराएंगे।
धृतराष्ट्र की १०० औलादें
सम्मेलन में उनके संबोधन का सबसे चर्चित हिस्सा तब आया जब संजय राऊत ने धृतराष्ट्र की उपमा दी। उन्होंने कहा कि मेरे मन में हमेशा यह सवाल उठता था कि धृतराष्ट्र को १०० बेटे वैâसे हुए? लेकिन इस बात का जवाब खुद मोदी और भाजपा ने ही दे दिया है। अब मतदाता सूची देखो। एक-एक बाप के ४० बच्चे हैं। लेकिन वह बाप ‘ब्रह्मचारी’ है। मोदी के निर्वाचन क्षेत्र में ऐसे ७० बाप हैं और भाजपा इसी वजह से जीतती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई पर फिर से कौरवों की नजर है। हम पांडवों की भूमिका में खड़े होकर लड़ेंगे।
मुंबई जीतने के लिए घोटाले
संजय राऊत ने कहा कि यह लड़ाई मुंबई की है और अब मुंबई जीतने के लिए वोटर लिस्ट में घोटाले शुरू हो गए हैं। लेकिन हम सब उसके खिलाफ एकत्र आए हैं। यह मुंबई की लड़ाई स्थानीय लोगों की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे हमेशा कहते थे कि महाराष्ट्र को मुंबई मिलनी चाहिए। इसलिए संयुक्त महाराष्ट्र समिति की स्थापना हुई और उसके बाद मुंबई को महाराष्ट्र से फिर न तोड़ा जाए इसलिए शिवसेना की स्थापना हुई। वही शिवसेना आज भी है। वही रक्त शिवसेना में आज भी है।
आपके स्वर्ण महल टिक नहीं पाएंगे
संजय राऊत ने कहा कि हमने तुम्हें सहारा दिया, तभी तुम यहां तक पहुंचे। जो कहते हैं कि वे कांच के घरों में या स्वर्ण महलों में रह रहे हैं, वो भी हमारी वजह से है। अगर स्थानीय लोगों को बेदखल करने की कोशिश की गई, तो ये आपके स्वर्ण महल टिक नहीं पाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि मोदी और उनके सौ बाप भी नीचे उतर आएं, तब भी शिवसेना हमारी ही रहेगी। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप, रूस के पुतिन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से पूछो शिवसेना किसकी है?, तो वे भी बताएंगे कि शिवसेना किसकी है। लेकिन चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट अभी तक यह नहीं बता पा रहा। इस तरह उन्होंने शिवसेना की पहचान पर अपनी दृढ़ भूमिका रखी।
