सोम मिश्रा “शिवम”
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मकार श्रीराम राघवन की फिल्म “इक्कीस” एक २१ साल के जवान की जिंदगी का सच सामने लाती है — १९७१ के युद्ध में जिस एक लड़के की हिम्मत ने इतिहास की दिशा बदल दी, उसी हिम्मत का नाम है अरुण खेतरपाल। यह सिर्फ़ युद्ध नहीं था, यह भरोसा था अपने देश पर, अपने फ़र्ज़ पर और अपने खून के उबाल पर।
आपको बता दें यह फिल्म कोई साधारण वार ड्रामा नहीं है। यह है जज़्बे, ईमानदारी, मौत, देशभक्ति और जवान खून की आग पर लिखा गया सवाल — जब वक़्त देश का होता है तो २१ की उम्र भी अमर कैसे हो जाती है। अगस्त्या नंदा ने उस जवान की भूमिका निभाई है, जो उम्र से छोटा और हौसले से विराट था। वैसे भी हर बड़ी दास्तान जवानी से शुरू होती है। तो इस दिसंबर तैयार रहें फिल्म “इक्कीस” के साथ वर्ष २०२५ के समापन का शानदार इतिहास रचने के लिए।
