राजन पारकर
नाशिक कुंभमेले के लिए लगाए जा रहे सीसीटीव्ही प्रोजेक्ट का ठेका ₹294 करोड़ की भारी लागत से मॅट्रिक्स कंपनी को दिया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि 2015 में यही काम मात्र ₹9.94 करोड़ में किया गया था। यानी कि लगभग ₹284 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च!
सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुंभार ने अपने ट्वीट में इस पूरे मामले पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा — “ठाणे शहर के सीसीटीव्ही प्रोजेक्ट का RFP आरएफपी हूबहू कॉपी-पेस्ट करके नाशिक कुंभ मेले के लिए इस्तेमाल किया गया। इसी ‘कॉपी-पेस्ट’ के लिए EY Consultant को भुगतान किया गया!”
दिलचस्प यह भी है कि मॅट्रिक्स कंपनी वही है जिसने ठाणे सीसीटीव्ही प्रोजेक्ट का काम भी किया था।
दोनों प्रोजेक्ट्स की टेंडर प्रक्रिया में समानता और लागत में हुई भारी वृद्धि ने शासन की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।
2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नाशिक कुंभ मेले के सीसीटीव्ही इंस्टॉलेशन में हुई अनियमितताओं की जांच के आदेश दिए थे। उस समय मुंबई की एक कंपनी को ₹9.94 करोड़ का टेंडर दिया गया था।विपक्ष ने सिंगल बिड मंजूरी, नियमों की अनदेखी और अपारदर्शी टेंडर प्रक्रिया को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी।
फडणवीस ने तब कहा था “सरकार का इरादा स्थायी सीसीटीव्ही लगाने का था, लेकिन तीन महीने में यह संभव नहीं था, इसलिए अस्थायी व्यवस्था की गई।”
लेकिन 11 साल बाद भी स्थायी सीसीटीव्ही नहीं लगाए गए, और वही प्रोजेक्ट अब ₹9.94 करोड़ से बढ़कर ₹294 करोड़ का हो गया है!
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