मुख्यपृष्ठसमाचारअव्यावहारिक शर्तों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

अव्यावहारिक शर्तों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

दिल्ली/मुंबई: वक्फ़ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाले मुख्य याचिकाकर्ताओं में से एक मालाड के समाजसेवी मुहम्मद जमील मर्चेंट ने अपनी कानूनी टीम के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन, अधिवक्ता एजाज मकबूल, अधिवक्ता बुरहान बुखारी और अधिवक्ता सैफ जिया के मार्फत अब सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका (एप्लिकेशन फॉर डायरेक्शन) दायर की है।

जमील मर्चेंट ने पहले ही वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जो अभी विचाराधीन है। इसी बीच, सरकार ने ‘उम्मीद’ पोर्टल लॉन्च करके पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे वक्फ संपत्तियों के प्रबंधकों पर भारी दबाव है। पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण के लिए लागू की गई अव्यावहारिक और पक्षपातपूर्ण शर्तों से तत्काल राहत की मांग की गई है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया गया है कि अव्यावहारिक शर्तों के कारण, लाखों वक्फ संपत्तियों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है, क्योंकि उनका पंजीकरण समय पर और सही तरीके से नहीं हो पाएगा।  यह पारदर्शिता का विरोध नहीं है, बल्कि एक व्यावहारिक और न्याय संगत प्रक्रिया सुनिश्चित करने का अनुरोध है।

सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध करते हुए मुख्य रूप से मांग की गई है कि वक्फ संपत्तियों का विवरण ‘उम्मीद’ पोर्टल पर दर्ज करने की छह महीने की समय सीमा को तब तक बढ़ाया जाए, जब तक कि मुख्य मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता। केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया जाए कि वह ‘उम्मीद’ पोर्टल को संशोधित करे ताकि सैकड़ों साल पुरानी और ऐतिहासिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण बिना किसी बाधा के हो सके।  जमील मर्चेंट का मानना है कि जब तक अदालत कानून की वैधता पर अंतिम निर्णय नहीं लेती, तब तक वक्फ़ संपत्तियों को किसी भी तरह के नुकसान से बचाना अत्यंत आवश्यक है।

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