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न्यूज स्कैन : कलियुगी पिता की काली करतूत

खुशबू सिंह
आए दिन रिश्तों की पवित्रता को कलंकित करने वाली घटनाएं समाज को झकझोरने का काम करती हैं। ऐसे ही इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक ऐसी ही घटना कुछ दिनों पहले ही बल्लभगढ़ इलाके से सामने आई, जहां एक ४२ वर्षीय ऑटोरिक्शा चालक पिता ने अपनी ही १४ साल की बेटी को शिकार बनाया। पिछले दो महीनों से हर रात नशे में धुत होकर वो इस किशोरी के साथ दुष्कर्म कर रहा था। ये राज तब खुला, जब लड़की की तबीयत बिगड़ी और उसने मदद मांगी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन ये घटना परिवार की टूटन, शराब की लत और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आइए, इस पूरी घटना को विस्तार से समझते हैं।
पारिवारिक टूटन का दर्दनाक परिणाम
ये कहानी शुरू होती है एक साधारण परिवार से, जो शराब की लत के कारण बिखर गया। आरोपी पिता की पत्नी, रोजाना की मारपीट और झगड़ों से तंग आकर, छह बच्चों में से दो को लेकर चरखी दादरी में अपनी बहन के पास चली गई। पीछे रह गईं चार नाबालिग बच्चियां और एक बेटा, जिनकी देखभाल का जिम्मा पिता पर था, लेकिन पत्नी के जाने से नाराज इस कलियुगी पिता ने अपनी सबसे बड़ी बेटी, जो सातवीं कक्षा की छात्रा है, को अपना निशाना बना लिया। पुलिस जांच से पता चला कि वो लगभग हर रात शराब पीकर घर लौटता और बच्ची के साथ जबरदस्ती करता। डर और शर्म के कारण किशोरी चुप रही, लेकिन उसका शरीर इस यातना को सहन नहीं कर सका।
बीमारी ने तोड़ा सन्नाटा
एक दिन सुबह, पेट दर्द और बुखार से पीड़ित लड़की पड़ोस की एक बुजुर्ग महिला के पास इलाज के लिए गई। महिला उसे डॉक्टर के पास ले गई, जहां जांच के दौरान किशोरी ने उस रात की घटना का जिक्र किया। डॉक्टर और महिला हैरान रह गए। तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई और जांचकर्ताओं की टीम पहुंची। काउंसलिंग सेशन में लड़की ने सब कुछ बयां कर दिया कि वैâसे पिता दो महीनों से उसका शोषण कर रहा था। फरीदाबाद पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी यशपाल यादव ने बताया कि पीड़िता के बयान पर पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
बच्चों की सुरक्षा और समाज का आईना
ये घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की विफलता को दर्शाती है। पुलिस अब आरोपी की तीन अन्य नाबालिग बेटियों की काउंसलिंग कर रही है, ताकि पता चले कि क्या वे भी शोषण का शिकार हुईं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में पारिवारिक कलह, नशाखोरी और जागरूकता की कमी मुख्य वजह होती है। भारत में पोक्सो एक्ट जैसे कानून हैं, जो बच्चों को यौन शोषण से बचाते हैं, लेकिन लागू करने में चुनौतियां हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, २०२३ में हरियाणा में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में १५ फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
ये कहानी हमें सिखाती है कि बच्चों की आवाज सुनना कितना जरूरी है। पड़ोसी, स्कूल और समुदाय की भूमिका अहम होती है। अगर आप या कोई जानकार ऐसी स्थिति में है, तो तुरंत १०९८ (चाइल्डलाइन) या पुलिस से संपर्क करें। न्याय की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इस घटना से सबक लेकर समाज को मजबूत बनाना होगा।

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