कोरोना के दौरान जान गंवाने वाले निजी डॉक्टरों को भी मिले ५० लाख का मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-१९ महामारी के दौरान जान गंवाने वाले निजी डॉक्टरों को लेकर एक अहम पैâसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अगर हम कोविड-१९ के दौरान जान देने वाले डॉक्टरों के साथ खड़े नहीं हुए, तो देश कभी माफ नहीं करेगा। कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि जिन निजी डॉक्टरों ने इस भयावह महामारी के दौरान अपने क्लीनिक खुले रखे और इलाज करते हुए उन्होंने अपनी जान गवां दी, उन्हें भी केंद्र की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज बीमा योजना के तहत ५० लाख रुपए का मुआवजा मिलना चाहिए।
इस मामले की सुनवाई पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को की। पीठ ने सरकार के उस पैâसले की आलोचना की, जिसमें उसने कहा था कि यह लाभ केवल उन्हीं डॉक्टरों को मिलेगा, जिन्हें राज्य या केंद्रीय अधिकारियों द्वारा औपचारिक रूप से कोविड-१९ की ड्यूटी के लिए तैनात किया गया था। कोर्ट ने अपना पैâसला महाराष्ट्र के उन पांच डॉक्टरों की विधवाओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया, जिनके पतियों की कोविड-१९ के दौरान मौत हो गई थी। उन्हें इस आधार पर लाभ देने से इनकार कर दिया गया था कि उन्हें कोविड के दौरान ड्यूटी करने के लिए औपचारिक रूप से नियुक्त नहीं किया गया था। मार्च २०२१ में मुंबई हाई कोर्ट ने सरकार के इस रुख को बरकरार रखा कि केवल केंद्र या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किए गए लोग ही इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
`डॉक्टर बाल नहीं काट रहे थे’
इस मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, ‘अगर डॉक्टरों ने कोविड के दौरान अपने क्लीनिक खोले, तो वे वहां बाल नहीं काट रहे थे। हमें अपने डॉक्टरों पर गर्व है, सैकड़ों डॉक्टर महामारी के दौरान अपनी जान गवां चुके हैं। हमारा देश ऐसा महान देश है, जहां डॉक्टर कोविड के दौरान प्रâंटलाइन वॉरियर्स के रूप में आगे थे और अपनी जान और स्वास्थ्य को जोखिम में डालकर अपनी सेवाएं दे रहे थे।’ पीठ ने कहा कि यह कहना आसान है कि वे घर बैठ सकते थे, लेकिन कोविड के दौरान हर उस व्यक्ति की सेवाएं ली जा रही थीं, जो मदद कर सकता था।
