हमारे देश में ऐसी छवि बनाई गई है कि मोदी सरकार अब अमेरिका द्वारा लगाए गए ‘टैरिफ युद्ध’ और अन्य दबावों के आगे किस तरह नहीं झुक रही है और किस कुशलता से भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रही है। इसके लिए सरकार और भक्त मंडली भारत द्वारा रूस और चीन समेत अन्य देशों के साथ किए जा रहे व्यापारिक समझौतों का उदाहरण दे रहे हैं। दरअसल, हकीकत यह है कि जिन देशों के साथ मोदी सरकार व्यापारिक समझौते कर रही है, वे भारत के दुश्मन राष्ट्रों के साथ भी समझौते कर रहे हैं और मोदी सरकार और भक्तों के दावों की हवा निकाल रहे हैं। जिन देशों के प्रधानमंत्रियों को मोदी गले लगाते हैं, वही देश मोदी के जाते ही भारत के दुश्मनों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्की आदि के साथ समझौते कर लेते हैं। ब्रिटेन ने तीन हफ्ते पहले भारत के साथ करीब ३,८८४ करोड़ रुपए का आर्थिक और रक्षा समझौता किया था। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और प्रधानमंत्री मोदी ने ९ अक्टूबर को मुंबई में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। मोदी सरकार और उसके समर्थकों ने इस समझौते को ऐतिहासिक वगैरह बताया था। इस समझौते के बारे में कहा गया था कि यह दोनों देशों के बीच ‘कांप्लेक्स वेपन्स पार्टनरशिप’ की दिशा में एक बड़ी छलांग है। लेकिन इस छलांग से पहले ही ब्रिटेन, पाकिस्तान के नंबर एक मित्र तुर्की के साथ करीब १०.७ अरब डॉलर का रक्षा समझौता किया है।
तुर्की के साथ समझौते से
मोदी सरकार के दावे की पूरी तरह से पोल खुल गई है। क्योंकि तुर्की पाकिस्तान का मित्र यानी भारत का दुश्मन ही है। तुर्की ने ही सबसे पहले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया था और उसे ड्रोन मुहैया कराए थे। ब्रिटेन अकेला देश नहीं है, जिसने मोदी सरकार के तथाकथित स्वाभिमान की ऐसी की तैसी की है। रूस, जिसके साथ मोदी का ‘अपनापन’ चल रहा है, ने भी इसी महीने पाकिस्तान के साथ एक अहम रक्षा समझौता किया है। इसके मुताबिक, वह रूस और पाकिस्तान के जेएफ-१७ थंडर लड़ाकू विमानों के लिए आरडी-९३ एमए इंजन मुहैया कराएगा। खास बात यह है कि रूस ने भारत के कड़े विरोध को कूड़ेदान में फेंककर यह समझौता किया है। गौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया कि भारत अमेरिकी दबाव में न आकर रूस से तेल खरीद रहा है। सऊदी अरब और चीन के मामले में भी यही बात लागू होती है। मोदी भक्त कहते रहते हैं कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान प्रधानमंत्री मोदी के खास मित्र हैं। लेकिन उनके इस खास मित्र ने पिछले महीने पाकिस्तान के साथ एक अहम समझौते पर दस्तखत करके इस मित्रता को ताक पर रख दिया! इस समझौते के तहत, सऊदी अरब या पाकिस्तान पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस समझौते के चलते तथाकथित मोदी सरकार की
कूटनीति का वस्त्रहरण
हुआ है। दरअसल, ईंधन के क्षेत्र में सऊदी अरब के पास भारत जितना अहम कोई दूसरा बाजार नहीं है, लेकिन ‘मोदी मित्र’ सऊदी राजकुमार ने इस बात पर गौर तक नहीं किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की बदली नीतियों के कारण मोदी सरकार इस वक्त बेहद धोखेबाज दुश्मन चीनी ड्रैगन से गलबहियां डाल रही है। लेकिन यही ड्रैगन पाकिस्तान के साथ मिलकर बांग्लादेश के ‘प्रोजेक्ट एयरबेस’ के लिए पहल कर रहा है, जो भारत के लिए बेहद खतरनाक है। यह ‘हैंगर’ भारत के ‘चिकन नेक’ कहे जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब है। हर वह देश जिसे प्रधानमंत्री मोदी इस समय ‘मित्र’ कह रहे हैं और जिन-जिन राष्ट्र के अध्यक्षों के साथ गलबहियां डालते हुए भारत के राष्ट्रीय हित की सुरक्षा का दावा भर रहे हैं, वह हर देश भारत के साथ ‘डबल गेम’ खेल रहा है। रूस-चीन से लेकर सऊदी-ब्रिटेन तक, सभी देश एक तरफ तो मोदी से ‘अपनेपन’ की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान, बांग्लादेश, तुर्की आदि देशों के साथ भारत के राष्ट्रीय हितों का गला घोंटने वाले समझौते कर रहे हैं। दुनिया भारत के साथ ‘गोलमाल’ खेल, खेल रही है और मोदी सरकार देश के स्वाभिमान की ऐसी की तैसी कर रही है!
