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एआई से हर रोज लाखों लोग पूछ रहे … `सुसाइड कैसे करें?’ …ओपनएआई ने किया चौंकानेवाला खुलासा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज हमारी लाइफ का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि चैटजीपीटी जैसा टूल लाखों-करोड़ों लोगों की मानसिक पीड़ा का साथी भी बन रहा है? हाल ही में ओपनएआई ने एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने दुनिया को हिलाकर रख दिया। चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई के अनुसार, करोड़ों लोग हर रोज चैटजीपीटी से आत्महत्या की बातें कर रहे हैं। सुसाइड के बारे में सवाल पूछ रहे हैं।
हर हफ्ते लगभग ८० करोड़ यूजर्स आत्महत्या से जुड़ी चैट करते हैं। ज्यादातर सवाल मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित होते हैं, जहां लोग अपनी परेशानी पर चैटबॉट से सलाह मांगते हैं। इसका मुख्य कारण अकेलापन, डिप्रेशन और प्राइवेसी की चिंता बताया जा रहा है। कई लोगों के पास विश्वसनीय दोस्त नहीं होते या उन्हें यह डर होता है कि उनकी बातों का इस्तेमाल उनके खिलाफ हो सकता है। यह डेटा न केवल एआई की जिम्मेदारी पर सवाल उठाता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के वैश्विक संकट को भी उजागर करता है। ओपनएआई की नई रिपोर्ट की मानें तो चैटजीपीटी के ८० करोड़ साप्ताहिक सक्रिय यूजर्स में से ०.१५ प्रतिशत (लगभग १२ लाख) यूजर्स ऐसी बातचीत में शामिल होते हैं, जो सुसाइड के इरादे या विचारों का संकेत देती हैं। यानी हर हफ्ते १० लाख से ज्यादा सुसाइड से जुड़ी चर्चाएं हो रही हैं। बता दें कि ये आंकड़े किसी सर्वे पर नहीं, बल्कि एआई के चैट हिस्ट्री एनालिसिस पर आधारित हैं। रिपोर्ट में एक उदाहरण दिया गया है, जहां एक यूजर ने सुसाइड के तरीकों पर २१३ बार चर्चा की, जिसमें फांसी या नोज जैसे शब्द ४२-१७ बार यूज किए गए। चैटजीपीटी ने इस दौरान सुसाइड शब्द यूजर से ६गुना ज्यादा (१,२७५ बार) इस्तेमाल किया, जो एआई की प्रतिक्रिया की गहराई को दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये संख्या वास्तविकता से भी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई यूजर्स अपनी पीड़ा छिपा लेते हैं।
किशोरों पर एआई का बुरा असर
यह खुलासा तब आया जब अमेरिका में एक १६ साल के लड़के एडम रेन की सुसाइड केस ने सुर्खियां बटोरीं। परिवार का आरोप है कि फरवरी २०२५ में ओपनएआई ने सुसाइड प्रिवेंशन को `डिसअलाउड कंटेट’ से हटाया, जिसके बाद लड़के ने चैटजीपीटी से गोपनीयता और `बेहतर’ सुसाइड मेथड पर बात की, जिसके बाद परिवार ने मुकदमा दायर किया और दावा किया कि यह `डिजाइन चॉइस’ का प्रत्यक्ष नतीजा था।

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