मुख्यपृष्ठस्तंभपूर्वांचल पॉलिटिक्स : पिल्ला-पिल्ली के स्तर पर उतरी सियासी भाषा ...टूटती राजनीतिक...

पूर्वांचल पॉलिटिक्स : पिल्ला-पिल्ली के स्तर पर उतरी सियासी भाषा …टूटती राजनीतिक मर्यादा!

हिमांशु राज

ओपी राजभर और रमाशंकर राजभर के बीच जुबानी जंग ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। दोनों नेता एक ही समुदाय से आते हैं, फिर भी व्यक्तिगत स्तर पर एक-दूसरे पर धारदार बयानबाजी कर रहे हैं। शुरुआत तब हुई, जब सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के वैâबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने सपा नेताओं के खिलाफ ‘पिल्ला-पिल्ली’ जैसे तीखे शब्दों का उपयोग किया। इस बयान पर समाजवादी पार्टी के सलेमपुर सांसद रमाशंकर राजभर ने प्रतिक्रिया जताते हुए ओपी राजभर को भाजपा का ‘पालतू कुत्ता’ बताया और कहा कि वे सिर्फ पार्टी की डिक्टेशन पर काम करते हैं। रमाशंकर राजभर ने आरोप लगाया कि ओपी राजभर रात में अखिलेश यादव से माफी मांगते हैं और दिन में भाजपा मंच पर दिखाई देते हैं। उन्होंने राजभर को भारत की राजनीति का ‘दूसरा पलटू राम’ भी कहा, जो अवसर के मुताबिक अपनी सोच बदलते रहते हैं। इस टकराव में सरकार की नीतियों, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और जनता की उपेक्षा का मुद्दा भी उठाया गया। सपा सांसद रमाशंकर ने बिहार चुनाव का हवाला देते हुए यह आरोप लगाया कि ओपी राजभर यूपी की जनता के बजाय बिहार के नेताओं और चुनाव की चिंता ज्यादा करते हैं। साथ ही सलेमपुर चुनाव की याद दिलाते हुए सवाल किया कि तब राजभर समाज के उम्मीदवार की मदद क्यों नहीं की गई थी? राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो इस विवाद को समाज में अनु-राजभर ध्रुवीकरण और स्थापित नेताओं के निजी स्वार्थ की लड़ाई के तौर पर देखा जा रहा है। किसानों की समस्या, प्रशासनिक भ्रष्टाचार, मीडिया के खिलाफ एफआईआर और सरयू नदी कटान जैसे मुद्दे भी इस बहस में सामने आए हैं। सांसद रमाशंकर राजभर ने दावा किया कि ऐसे नेता सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए कभी विचारधारा नहीं देखते, जबकि जनता महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से परेशान है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे जनता की आवाज उठाते रहेंगे, भले ही उनके खिलाफ केस दर्ज हों या किसी प्रकार का दबाव बनाया जाए। फिलहाल यह वाक युद्ध उत्तर प्रदेश की सियासत में व्यक्तिगत और सामाजिक असंतोष का प्रतीक बन गया है।

 

अन्य समाचार