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मुस्लिम वर्ल्ड :  १०४ लाशें, फिर भी सब ठीक!.. गाजा में क्या कर रहा इजरायल?

सूफी खान

एक ही रात में गाजा में १०० से ज्यादा लोग मार दिए और सुबह इजरायल कहता है कि हम सीजफायर का पालन कर रहे हैं। सवाल उठता है कि ये वैâसा सीजफायर है, वैâसी जंगबंदी है कि गाजा में सब कुछ इजरायल अपने हिसाब से अंजाम दे रहा है और कोई उसे रोकने-टोकने वाला नहीं। चर्चा शुरू हो गई है कि ट्रंप के साथ ही अरब और मुस्लिम देशों की गारंटी का क्या हुआ?
इजरायल द्वारा गाजा में हुर्इं इन ताजा कार्रवाइयों ने १० अक्टूबर को हुए सीजफायर को खतरे में डाल दिया है। हमास-इजरायल सीजफायर को हुए अभी एक महीना भी नहीं बीता है और इजरायल ने गाजा में हवाई हमले करके १०४ लोगों को मौत के घाट उतार दिया। फिर भी प्रेसिडेंट ट्रंप कहते हैं कि सीजफायर सुरक्षित है और इजरायल को अपनी हिफाजत का हक है। लेकिन सीजफायर के बीच इस कदर एयरस्ट्राइक और इजरायल का कहना कि जंगबंदी जारी है फिर भी इसकी गारंटी लिए अरब और मुस्लिम देशों की चुप्पी भी बता रही है कि वो अमेरिका और इजरायल से किस कदर खौफजदा रहते हैं।
इजरायल के हमलों में जान से हाथ धोने वालों में ४६ बच्चे और २० महिलाएं भी शामिल हैं। इजराइली सेना का कहना है कि हमास ने यलो लाइन के भीतर इजराइली सैनिकों पर हमला कर युद्धविराम का उल्लंघन किया। यलो लाइन वह सीमा रेखा है, जिसे दोनों पक्षों ने समझौते में तय किया था। दूसरी ओर हमास ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया और इसे इजरायल का प्रोपेगेंडा बताया था। कई एक्सपर्ट शुरू से ये शक जता रहे हैं कि ये समझौता ज्यादा दिन टिकेगा नहीं।
इसकी वजह है कि गाजा सीजफायर में हमास और इजरायल खुद नहीं शामिल थे, बल्कि अमेरिका, कतर और तुर्की ने उनकी गैरमौजूदगी में साइन कर दिए। उस पर से ईरान और उसकी रजिस्टेंस के नुमाइंदों को भी समझौते का हिस्सा नहीं बनाया गया, जो गाजा और फिलिस्तीन की आजादी के लिए बरसों से इजरायल के खिलाफ संघर्ष करने का दावा करते रहे हैं। जानकारों का मानना है कि संघर्ष विराम के बाद भी इजरायल की मनमानी रोकने की गारंटी कोई नहीं ले रहा।
जानकारों का मानना है कि सीजफायर की शर्त थी कि हमास इजरायल के जीवित बंधकों को छोड़ेगा और इजरायल की फौजें भी गाजा से पीछे हटेंगी। शर्त के मुताबिक, हमास ने सारे बंधक एक बार में छोड़ दिए हैं और इजरायल की फौजें अब भी गाजा में मौजूद हैं। ना सिर्फ मौजूद हैं, बल्कि हमले भी कर रही हैं, लोगों की जान भी जा रही है।
इसके लिए इजरायल के अपने तर्क और अपनी दलील है, लेकिन सच्चाई ये है कि गाजा में १० अक्टूबर के बाद भी एक दिन बमबारी नहीं रुकी। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट इस सीजफायर को नाटक बताते हैं। उनका कहना है कि गाजा में इजरायल ने ये ड्रामा सिर्फ अपने बंधक छुड़वाने के लिए रचा था। दूसरी अहम वजह थी कि दुनिया के अलग-अलग मुल्कों जिनमें ताकतवर यूरोपियन देश शामिल थे, वहां गाजा और फिलिस्तीन के लिए जमीन से लेकर समंदर तक में प्रदर्शन हो रहे थे।
यही वजह रही कि अमेरिका ने अरब देशों को आगे रखा और इजरायल ने बंधक आजाद करवा लिए। अब आरोप लग रहा है कि इजरायल गाजा में भी लेबनान वाला मॉडल अपना रहा है, जैसे लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ चली जंग के बाद सीजफायर तो हो गया, लेकिन सालभर बीत जाने के बावजूद साउथ लेबनान पर इजरायल के हमले हिजबुल्लाह को निशाना बनाकर जारी रहते हैं। वहां भी लेबनान सरकार के साथ पेपर पर तो सीजफायर है, लेकिन ग्राउंड पर इजरायली बमबारी अक्सर लेबनान की सीमा के अंदर हो रही है।
इजरायल, हमास और अमेरिका तीनों का कहना है कि शांति समझौता कायम है, लेकिन युद्धविराम के बावजूद नागरिक सुरक्षा, हवाई हमलों और हमास-इजरायल के टकराव ने इलाके में तनाव बढ़ा दिया है।

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