-स्वास्थ्य विभाग को दी वाहनों को फिट रखने की जिम्मेदारी
सुरेश गोलानी / भायंदर
भ्रष्टाचार और घोटालों के लिए हर समय चर्चा में रहनेवाले मीरा-भायंदर महानगरपालिका प्रशासन द्वारा लिए गए एक अजीबो-गरीब पैâसले ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों को न सिर्फ असमंजस में डाल दिया है बल्कि एंबुलेंस और शव वाहन सेवा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। मनपा प्रशासन ने अपने अधीन एक समर्पित वाहन विभाग के होते हुए एंबुलेंस और शव वाहनों की देखभाल, मरम्मत और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) संबंधित कागजी कार्यवाही की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग पर थोप दी है।
ज्ञात हो कि मनपा के बेड़े में अन्य वाहनों के अलावा ६ एंबुलेंस और चार शव वाहन शामिल हैं। आश्चर्य की बात है कि इनमें से ३ एंबुलेंस और २ शव वाहन लंबे अरसे से बंद अवस्था में हैं, जबकि बाकी की भी हालत खस्ता बनी हुई है। किसी का क्लच प्लेट और बैटरी खराब है तो किसी का एयर कंडीशनर और साइरन काम नहीं कर रहा है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात तो यह है कि नेशनल हेल्थ मिशन और परिवहन विभाग द्वारा बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर यह सभी एंबुलेंस और शव वाहन कई वर्षों से बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के ही मरीजों को लेकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें से अधिकांश वाहन ६ वर्षों से ज्यादा पुराने हो चुके हैं और कुछ १० साल से ज्यादा समय से सेवा में हैं। पूर्व नगरसेवक एड. रवि व्यास ने पत्र लिखकर मनपा आयुक्त राधा बिनोद शर्मा को नियमों का उल्लंघन और लोगों को हो रही असुविधाओं से अवगत कराया है। व्यास का कहना है कि एक तरफ मनपा प्रशासन एंबुलेंस खरीदी और स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपए खर्च करने का दावा करता है पर उसकी कथनी और करनी में बहुत बड़ा अंतर है। मनपा का दायित्व है कि एंबुलेंस जैसी जिंदगी बचाने वाली अहम सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए ठोस उपाय योजना बनाए और गैर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही करे।
