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कर्ज दो, माफ करो, फिर से नया कर्ज दो…विखे पाटील ने अन्नदाताओं के जख्मों पर रगड़ा नमक!

-मंत्री के बयान से महायुति सरकार की बढ़ीं मुश्किलें

सामना संवाददाता / मुंबई

महायुति सरकार में भाजपा के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने भी किसानों का अपमान करते हुए कठोर शब्दों से उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। मंत्री की फिसली जबान से सच्चाई निकल पड़ी और वे बोल उठे कि पहले सोसायटी बनाओ, कर्ज दो, बाद में उसे माफ कर दो और फिर से नया कर्ज दो। यह सालों से चलता आ रहा है। उनके इस बयान से न केवल महायुति सरकार की किरकिरी शुरू हो गई है, बल्कि विपक्षी दल घेरने लगे हैं और किसान संगठन भी आक्रोशित हो उठे हैं। इसके साथ ही किसानों के इस अपमान पर सोशल मीडिया पर भी मंत्री जमकर ट्रोल हो रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में किसान कर्जमाफी का मुद्दा फिर से सुलग उठा है। जल संपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील के बयान से अब सियासी और सामाजिक गलियारों में गुस्से की लहर पैदा हो गई है। इसी के साथ ही उनके बयान से किसानों में भी नाराजगी देखी जा रही है। किसान सभा के नेता अजीत नवले ने कहा है कि विखे पाटील किसानों पर दोष मढ़ने का काम कर रहे हैं, पर असलियत में किसानों पर कर्ज सरकार की गलत नीतियों का फल है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार आयात-निर्यात नीतियों में लगातार बदलाव करती रहती है। इसलिए बाजार मूल्य गिरती रहता है और किसानों को इससे होनेवाले घाटे को सहना पड़ता है। इसके अलावा फसल बीमा कंपनियों का मुनाफा बढ़ाया जाता रहता है, लेकिन किसानों को बीमा राशि मिलती ही नहीं है इसलिए किसान कर्ज में पूरी तरह से डूबते जा रहे हैं।  इसका ठीकरा किसानों पर फोड़ना उनके साथ एक तरह से अन्याय है।
किसान संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी
किसान संगठनों ने इस बयान के खिलाफ आंदोलन करने की चेतावनी दी है। किसान सभा की ओर से कहा गया है कि सरकार चुनाव से पहले कर्ज माफी का आश्वासन देती है, वोट लेती है और बाद में किसानों पर ही दोष मढ़ देती है। यह दोहरी नीति कतई नहीं चलेगी।
बावनकुले ने दी सफाई
दूसरी ओर इस विवादित बयान पर सफाई देते हुए राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि विखे-पाटील के बोलने का उद्देश्य अलग था। उनके कहने का मूल उद्देश्य यह था कि किसानों पर लदा कर्ज पूरी तरह से माफ हो और इस बात का ध्यान रखा जाए कि भविष्य में फिर से किसानों पर कर्ज का पहाड़ न हो।

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