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भाजपा राज में किसान रो रहा खून के आंसू! … उचित दाम न मिलने पर खुद की फसलें जला रहा अन्नदाता

– किसानों ने सरकार के दावों पर उठाए सवाल
कृषि प्रधान देश कहे जाने वाले हिंदुस्थान में किसानों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। सालभर खेती करने के बाद जब उसकी बिक्री का समय आता है तो अन्नदाताओं के हाथों सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है। अपनी फसलों के उचित दाम न मिलने से त्रस्त किसान अब अपनी ही फसलों को आग लगाकर उसे नष्ट कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश की मंदसौर कृषि उपज मंडी में प्याज के दाम किसानों को खून के आंसू रुला रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई किसानों ने अपनी खड़ी फसल को खेतों में ही नष्ट करना शुरू कर दिया है। मंदसौर मंडी में प्याज का भाव १ रुपए से लेकर अधिकतम ७ रुपए प्रति किलो तक ही मिल पा रहा है, जिससे किसानों की लागत तो दूर, मंडी तक आने का भाड़ा भी नहीं निकल पा रहा है। किसानों ने सरकार के दावों पर भी सवाल उठाए। रिजवान ने कहा कि सरकार ने बोला था किसानों की आय दोगुनी होगी, कुछ भी नहीं हुआ। बस बड़े-बड़े भाषण देते हैं, वादे करते हैं, लेकिन कुछ भी नहीं दिख रहा है और किसान परेशान हैं। इन कीमतों को देखकर किसानों का दर्द छलक पड़ा। बरखेड़ा वीरपुरिया से आए एक किसान ने बताया कि उन्होंने ट्रैक्टर का १,००० रुपए किराया दिया, लेकिन उनका प्याज सिर्फ १७० रुपए प्रति क्विंटल (यानी १.७० रुपए किलो) बिका। किसान ने कहा कि मैंने कटाई के १,७०० रुपए दिए और मुझे कुल ७०० रुपए ही मिलेंगे। लागत तो छोड़िए, जेब से घाटा जा रहा है। एक अन्य किसान भूपेंद्र सिंह ने बताया कि प्याज की कटाई का खर्च ही १०० रुपए क्विंटल आ रहा है और मंडी में भाव १०० से १५० रुपए मिल रहा है।

`अब बेटी की शादी का कर्ज कैसे चुकाऊंं’
उत्तराखंड के उधमसिंह नगर के किच्छा क्षेत्र में एक किसान ने मजबूरी में अपनी ही धान की फसल को आग लगा दी। किसान चंद्रपाल आर्थिक तंगी और सरकारी खरीद बंद होने से बेहद परेशान था। उसकी बेटी की शादी १५ दिन बाद होनी है और उसने बैंक से भी कर्ज ले रखा है। इसकी वजह से किसान मानसिक रूप से काफी परेशान चल रहा है। धान की बिक्री न होने से हताश चंद्रपाल ने सरकारी क्रय केंद्र पर अपने धान के ढेर में आग लगाने की कोशिश की।

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