मुख्यपृष्ठनए समाचारजलवायु आपदाओं से जूझता भारत ... ३० साल, ८०,००० हजार मौतें!

जलवायु आपदाओं से जूझता भारत … ३० साल, ८०,००० हजार मौतें!

आपदा प्रभावित देशों की सूची में ९वें नंबर पर अपना देश
भारत दुनिया के उन दस देशों में शामिल है, जो बीते तीन दशकों में जलवायु आपदाओं से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। पर्यावरण थिंक टैंक जर्मनवॉच की नई रिपोर्ट क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स २०२६ के मुताबिक, १९९५ से २०२४ के बीच भारत में करीब ४३० मौकों पर प्राकृतिक रूप से असहनीय मौसम की घटनाओं ने ८० हजार से अधिक लोगों की जान ली और १.३ अरब से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया।
इन आपदाओं से भारत को लगभग १७० अरब डॉलर (करीब १४ लाख करोड़ रुपए) का आर्थिक नुकसान हुआ है। यह रिपोर्ट ब्राजील के बेलेम शहर में आयोजित कॉप ३० सम्मेलन में मंगलवार को जारी की गई। इसमें कहा गया कि भारत में लगातार बढ़ती बाढ़, चक्रवात, सूखा और भीषण गर्मी जैसी घटनाएं जलवायु परिवर्तन के गंभीर असर को रेखांकित करती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्थिति लगातार खतरे जैसी है, यानी ये घटनाएं अब अलग-अलग नहीं, बल्कि बार-बार दोहराई जा रही हैं। इससे विकास की उपलब्धियों पर असर पड़ रहा है और करोड़ों लोगों की आजीविका खतरे में है। भारत की विशाल जनसंख्या और मानसूनी पैटर्न पर निर्भरता इसे खासतौर पर संवेदनशील बनाती है। रिपोर्ट बताती है कि हर साल करोड़ों लोग किसी न किसी रूप में भीषण मौसम की चपेट में आते हैं।

२०२४ में भारी बारिश-बाढ़ से ८० लाख लोग प्रभावित
साल २०२४ में अकेले भारी मानसूनी बारिश और अचानक आई बाढ़ों ने गुजरात, महाराष्ट्र और त्रिपुरा में करीब ८० लाख लोगों को प्रभावित किया। पिछले वर्ष दुनियाभर में सबसे ज्यादा नुकसान बाढ़ और तूफानों से हुआ, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचाया।

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