जनता अब भी कराह रही स्थानांतरित अस्पताल में
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महायुति सरकार के तमाम दावों और घोषणाओं के बावजूद ठाणे का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ जिला अस्पताल अब तक अधूरा ही पड़ा है। उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जिस अस्पताल को १८ महीनों में पूरा करने का वादा किया था, वह ३२ महीने बीत जाने के बाद भी १३ प्रतिशत काम से पिछड़ा हुआ है। ९०० बेड वाले इस सुपरस्पेशलिटी अस्पताल को लेकर सरकार ने जनता से बड़े-बड़े वादे किए थे। हेलीपैड, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, डायलिसिस यूनिट और सुपरस्पेशलिटी सेवाओं का सपना दिखाया गया था, लेकिन हकीकत में अब भी अधूरे निर्माणों का मंजर ही दिखाई देता है। दूसरी ओर जनता अब भी स्थानांतरित पुराने अस्पताल में इलाज के लिए लंबी कतारों में कराह रही है, जबकि अफसरशाही और ठेकेदारों की सुस्ती पर सरकार ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने भले ही कल के दौरे में ८७ प्रतिशत कार्य पूर्ण होने का दावा करते हुए संतोष जताया हो, मगर जमीन पर नजारा कुछ और ही बयां कर रहा है। महाराष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बुधवार सुबह ठाणे जिला अस्पताल की नई इमारत के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस मौके पर उन्होंने परियोजना की प्रगति पर संतोष जताते हुए कहा कि अब तक ८७ प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग, महावितरण और स्वास्थ्य विभाग आपसी समन्वय से शेष कार्य युद्धस्तर पर पूरा करें। दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर काम की सुस्ती ने इस ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथों शुरू हुए इस सुपरस्पेशलिटी जिला अस्पताल के काम को १८ महीनों में पूरा करने का वादा किया गया था, मगर अब ३२ महीने बीत जाने के बाद भी १३ प्रतिशत निर्माण अधूरा है।
निर्माण कार्य में देरी से जनता परेशान
महायुति सरकार इसे स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक सुधार बता रही है, लेकिन निर्माण की धीमी गति और १३ प्रतिशत अधूरे काम ने ठाणे और आसपास के क्षेत्रों के नागरिकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनता अब भी अस्थायी स्थानांतरित अस्पताल में कराह रही है, जबकि नया भवन अभी तक शुरू नहीं हुआ।
