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मोदी आए मीटिंग हुई नतीजा शून्य …केंद्र सरकार ने माना दिल्ली विस्फोट को आतंकी घटना, आगे क्या…?

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
दिल्ली में लाल किले के पास हुए ब्लास्ट को लेकर केंद्र सरकार के पास अब भी कोई ठोस जवाब नहीं है। कल भूटान यात्रा से लौटते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उक्त धमाके पर वैâबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की आपात बैठक बुलाई। पीएम मोदी आए, मीटिंग ली और चले गए, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा। केंद्र सरकार ने दिल्ली विस्फोट को आतंकी घटना तो बता दिया, लेकिन आगे की कार्रवाई के बारे में कुछ खास नहीं कहा।
बता दें कि बैठक के बाद केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से यह स्वीकार किया कि दिल्ली विस्फोट एक आतंकी हमला था। हालांकि, इस अहम मीटिंग से कोई ठोस कार्रवाई योजना या निर्णायक रोडमैप सामने नहीं आया, जिससे सुरक्षा एजेंसियों और जनता के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं। इस हमले में किस संगठन के शामिल होने की संभावना है या सुरक्षा ढांचे में कहां चूक हुई, इस पर भी सरकार ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। करीब दो घंटे चली इस हाई-लेवल बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के साथ गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और शीर्ष खुफिया अधिकारी मौजूद रहे। उक्त बैठक के तुरंत बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि लाल किले का विस्फोट एक जघन्य आतंकी घटना है। जांच एजेंसियां सभी एंगल से मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हैं। उधर, केंद्रीय एजेंसियों विस्फोट के विदेशी लिंक और आतंकी नेटवर्क की संभावनाओं को खंगाल रही हैं।

कार्रवाई कब होगी?
विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आतंकी हमले के बाद भी सरकार सिर्फ बैठकों और बयानबाजी तक सीमित है। सरकार ने इस घटना को आतंकी हमला मान लिया है, लेकिन सवाल उठता है कि न किसी संदिग्ध की गिरफ्तारी, न कोई सुरक्षा नीति की घोषणा, और ना कोई स्पष्ट संदेश अभी तक दिया गया है। देश की राजधानी में सुरक्षा अलर्ट हाई लेवल पर है, लेकिन जनता के मन में सवाल वही क्या दिल्ली फिर सुरक्षित है?

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