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धूल-आर्द्रता बन रही है घातक … मौसम बदलते ही मुंबई में दस्तक दे रहा ‘निमोनिया’!

बच्चे-बुजुर्ग बन रहे निशाना विशेषज्ञों ने जारी किया अलर्ट
सर्दी-खांसी को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में बदलते मौसम के साथ ही दस्तक देते हुए निमोनिया जानलेवा खतरे को बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी देते हुए बताया कि हवा में बढ़ती धूल और नमी की वजह से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। इस स्थिति में बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि सर्दी-खांसी जैसे लक्षणों को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है, क्योंकि यह निमोनिया के गंभीर रूप में तेजी से बदल सकता है। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति जानलेवा हो सकती है।
बता दें कि बदलते मौसम के साथ हवा में बढ़ती धूल और नमी ने निमोनिया के विषाणुओं व जीवाणुओं के पैâलने के लिए आदर्श परिस्थितियां निर्माण की हैं। श्वसन तंत्र में धूल के कण और आर्द्र हवा श्वसन मार्ग में जलन पैदा करके संक्रमण की संभावना को बढ़ा रही हैं। विशेष रूप से बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली इन हानिकारक सूक्ष्म जीवों का सामना करने में असमर्थ हो रही है। शहर के प्रमुख अस्पतालों में श्वसन रोग विशेषज्ञों ने पिछले एक सप्ताह में निमोनिया के मामलों में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की है, जो इस स्वास्थ्य संकट की गंभीरता को इंगित करता है। इस स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए श्वसन रोग विशेषज्ञों ने तत्काल सतर्कता बरतने की सलाह दी है। डॉक्टरों ने निमोनिया के प्रारंभिक लक्षणों जैसे लगातार खांसी, सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और तेज बुखार को कभी भी नजरअंदाज न करने की चेतावनी दी है।
बचाव में करें ये प्रमुख उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले आहार का सेवन, पर्याप्त जलयोजन और धूल-प्रदूषण वाले क्षेत्रों में मास्क पहनना इस संक्रमण से बचाव के प्रमुख उपाय हैं। साथ ही ६५ वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और पुरानी सांस की बीमारी वाले मरीजों को निमोनिया रोधी टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए। फिलहाल, मनपा के प्रमुख अस्पतालों ने निमोनिया के बढ़ते मामलों को देखते हुए तैयारियां बढ़ा दी हैं। शहर के स्कूलों में भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जहां बच्चों को स्वच्छता और निवारक उपायों के बारे में शिक्षित किया जा रहा है।

…तो बीमारी पर पाया जा सकता है काबू
चिकित्सकों के मुताबिक, नमी और प्रदूषण के कारण निमोनिया के रोगाणु तेजी से पैâल रहे हैं। समय पर पहचान और उपचार से इस बीमारी पर पूरी तरह से काबू पाया जा सकता है। नागरिक लक्षण दिखते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।

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