मुख्यपृष्ठसमाज-संस्कृतिसाहित्यिक अनुसंधान से हो नई दृष्टि का विकास - प्रो. इंद्रमणि

साहित्यिक अनुसंधान से हो नई दृष्टि का विकास – प्रो. इंद्रमणि

* राणाप्रताप पीजी कालेज में संगोष्ठी
सामना संवाददाता / सुल्तानपुर

‘साहित्यिक अनुसंधान का कार्य केवल मौजूदा ग्रंथों की समीक्षा करना नहीं है। बल्कि उसमें नवीन दृष्टिकोण एवं मौलिक संदर्भों को उजागर कर साहित्य को एक व्यापक सामाजिक परिप्रेक्ष्य में देखने की क्षमता विकसित करना भी है।’ यह बातें हिंदी साहित्य के मर्मज्ञ राणाप्रताप स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर इंद्रमणि कुमार ने कहीं।
वे शोध व स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए आयोजित अनुसंधान प्रक्रिया और प्रविधि विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रहे थे।
अध्यक्षता करते हुए प्रो. रंजना पटेल ने कहा कि अनुसंधान में प्रयुक्त होने वाली रणनीति प्रकिया और तकनीक पहले से स्पष्ट होनी चाहिए।विश्लेषण के लिए साक्ष्य एकत्र करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर ज्ञानेन्द्र विक्रम, स्वागत डा.विभा सिंह व आभार ज्ञापन ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह ने किया। इस अवसर पर शोध व एमए हिंदी के सभी विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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