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मुस्लिम वर्ल्ड : ईरान का ‘२००० प्लान’ क्या?.. इजरायल के लिए बड़ी चुनौती

सूफी खान

जून में १२ दिनों की ईरान-इजरायल जंग के दौरान इजरायल में तबाही का आलम था। कोना-कोना धूल में तब्दील हो गया था। मीडिया रिपोर्ट कहती है कि जंग के तीन-चार दिन बाद ही इजरायल को समझ आ गया था कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को छेड़कर उसने भूल कर दी।
लेकिन इस बार ऐसी कोई भी भूल इजरायल के वजूद के लिए खतरा बन सकती है, क्योंकि इस बार मिसाइलों की झड़ी लगने वाली है, ईरान की तरफ से। कहा जा रहा है कि ईरान ने १२ दिनों में सिर्फ ५०० मिसाइलें दागी थीं, लेकिन अब एक ही बार में २००० फायर किए जाएंगे। पिछली जंग में इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम ने ५०० मिसाइल के अटैक में ही जवाब दे दिया था। तो ईरान की २००० मिसाइलों को झेलने की ताकत कहां से लाएगा, ये बड़ा सवाल है। ईरान के एक सीनियर अफसर का दावा है कि इस्लामिक रिपब्लिक की मिसाइल पैâक्ट्रियां २४ घंटे गुलजार रहती हैं। वो कहते हैं कि अगर इजरायल को लगता है कि जून में शुरू हुआ काम अधूरा रह गया है तो ये सोच उसे इस बार ले डूबेगी। ये आक्रामकता ईरान के साथ नहीं चलने वाली। वो दावा कर रहे हैं कि ईरान ने अपनी जवाब देने की ताकत को दोगुना-तिगुना कर दिया है।
गौरतलब है कि जून २०२५ में इजरायल के सरप्राइज अटैक के बाद ईरानी जवाबी हमलों ने इजरायल की मिसाइल रक्षा की अजेयता को नष्ट कर दिया। आधा दर्जन सैन्य ठिकानों, मोसाद के मुख्यालय, फौज से जुड़े रिसर्च सेंटर, बिजली घरों, बंदरगाहों और बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचाया था। वह तब था जब ईरान ने एक दिन में दर्जनों मिसाइलें दागी थीं और इनकी सबसे बड़ी तादाद एक दिन में १०० मिसाइल थी। लेकिन अब ये तादाद एक दिन में २ हजार होने जा रही है। मिडिल ईस्ट से खबर तो ये भी आ रही है कि इराक में मौजूद ईरान के एक बेहद अहम हिमायती ग्रुप हशदुश्शाबी या पापुलर मोबलाइजेशन फोर्स को इजरायल के जरिए निशाना बनाया जा सकता है। इराक और ईरान की सरहद मिलती है। भले ही इजरायल इस बार डायरेक्ट ईरान से उलझने से बचे। लेकिन वो ईरान हिमायती तंजीमों या जिन्हें प्रॉक्सी कहा जाता है, उन्हें निशाने पर ले सकता है। ये ईरान की ताकत को कम करने की इजरायल और अमेरिका की रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे हालात से निपटने के लिए ही ईरान अपनी मिसाइल ताकत को लगातार धार दे रहा है।
इस बीच ईरान अपनी जंगी तैयारियों को भी मजबूती से आगे बढ़ा रहा है। अमेरिका जिस तरह से मिडिल ईस्ट में मौजूद अपने एयर बेस में जंगी साजो-सामान इकट्ठा कर रहा है, साथ ही इसके लिए भारी खर्चा कर रहा है, उसको देखकर लग रहा है कि मिडिल ईस्ट में स्थाई शांति नहीं आई है। कहा जाता है कि जंग शुरू करना आसान है, लेकिन खत्म वैâसे होगी और कौन करेगा, ये कहना मुश्किल होता है। रूस-यूक्रेन जंग इसकी सबसे बड़ी मिसाल है, जो तीन साल से चलती ही जा रही है।

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