मुख्यपृष्ठखेलहनीफनामा : राज और हृषिकेश की यारी

हनीफनामा : राज और हृषिकेश की यारी

हनीफ जवेरी

दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है, जो हर रिश्ते पर भारी है। कभी ये हंसी बांटती है, तो कभी आंसू छिपा लेती है। ये वो रिश्ता है जहां कोई बात राज नहीं रहती, बल्कि हर दर्द और खुशी साझा होती है। फिल्म इंडस्ट्री भी इससे अछूती नहीं है। यहां भी कई ऐसे दोस्त देखने को मिले हैं, जो एक-दूसरे की खुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार रहे। कौन भूल सकता है फिल्म निर्देशक हृषिकेश मुखर्जी और ‘शोमैन’ राज कपूर की अमर दोस्ती को?
हृषिकेश मुखर्जी और राज कपूर की गहरी दोस्ती फिल्म ‘अनाड़ी’ की मेकिंग के दौरान हुई। इसके बाद उन्होंने १९६२ की फिल्म ‘आशिक’ के लिए भी साथ काम किया और आगे चलकर फिल्म ‘नौकरी’ भी साथ की, जिसमें पहली बार राजेश खन्ना, राज कपूर के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आए। १९६० में दोनों घूमने के मकसद से विदेश साथ गए थे, जहां राज कपूर की तबीयत इतनी खराब हो गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। राज अपने परिवार से दूर जरूर थे, लेकिन उन्हें अपनी चिंता बिल्कुल नहीं थी क्योंकि उनका जिगरी दोस्त हृषिकेश उनके पास था। हृषिकेश ने भी उनकी बीमारी के दौरान नि:स्वार्थ भाव से उनकी खूब सेवा की। अपने हाथों से उन्हें खिलाया-पिलाया और जब अस्पताल से छुट्टी मिली तब भी हृषिकेश ने राज का पूरा खयाल रखा। जब राज पूर्णत: स्वस्थ हो गए तब हृषिकेश उन्हें अपने साथ भारत लेकर लौटे। भारत लौटने के बाद कपूर परिवार को पता चला कि राज विदेश में बुरी तरह बीमार पड़ गए थे।
एक रोज हृषिकेश मुखर्जी ने अपनी और राज की दोस्ती से प्रेरित होकर उसी विषय पर फिल्म बनाने की ठान ली। इस तरह क्लासिक फिल्म ‘आनंद’ की शुरुआत हुई। कहानी को रोचक बनाने के लिए हीरो यानी आनंद को ऐसी बीमारी से ग्रस्त दिखाया गया जो लाइलाज थी। अब चूंकि फिल्म का विषय उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा था इसलिए फिल्म के कई दृश्यों की पटकथा उन्होंने दोबारा खुद लिखी, जबकि फिल्म के पटकथा लेखक गुलजार के अलावा डी.एन. मुखर्जी और बिमल दत्ता लिख चुके थे।
जब ‘आनंद’ की पटकथा पूरी हुई तो हृषिकेश मुखर्जी को हास्य कलाकार महमूद और किशोर कुमार की गहरी दोस्ती का ध्यान आया। दोनों बचपन से ‘बॉम्बे टॉकीज’ के सेट पर साथ खेल-कूद कर बड़े हुए थे और हमेशा एक-दूसरे का साथ देने के लिए तैयार रहते थे। इसी कारण किशोर कुमार ने महमूद की कई फिल्मों में बिना पारिश्रमिक लिए काम किया था।
हृषिकेश मुखर्जी ने निश्चय किया कि किशोर को शीर्ष भूमिका ‘आनंद’ की और महमूद को ‘बाबू मोशाय’ की भूमिका दी जाएगी, परंतु इससे पहले कि किशोर और महमूद को फिल्म आनंद के लिए अनुबंधित किया जाता सुपरस्टार राजेश खन्ना स्वयं हृषिकेश से मिलने पहुंच गए और उनके साथ काम करने की इच्छा व्यक्त की। इतने बड़े सितारे को कम बजट की फिल्म में लेना संभव नहीं था इसलिए हृषिकेश ने फिल्म को सीमित बजट में बनाने की अपनी योजना राजेश खन्ना को बताई। इस पर खन्ना ने कहा कि जो भी पारिश्रमिक दिया जाएगा, उन्हें स्वीकार होगा।
यही वह क्षण था जब न केवल राजेश खन्ना, बल्कि अमिताभ बच्चन का भी फिल्म ‘आनंद’ में प्रवेश हुआ और दोनों ने ऐसे मित्रों की भूमिका निभाई, जिसकी चर्चा आज तक होती है। लेकिन जो दोस्ती राज कपूर और हृषिकेश मुखर्जी या किशोर कुमार और महमूद के बीच देखी गई, वैसी दोस्ती कभी राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन के बीच देखने को नहीं मिली।

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