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डेंजर में मिडिल क्लास … २ करोड़ नौकरियों पर मंडराया खतरा! …अर्थव्यवस्था में गहराते संकट की विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इस समय मंदी का साया है। इसके साथ ही विश्व में अस्थिरता भी बढ़ रही है। इसी माहौल में कई कंपनियां बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही हैं। इससे मध्यमवर्ग पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। अब कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लगभग २ करोड़ भारतीयों को अपनी नौकरियां खोनी पड़ सकती हैं। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर संकट और गहरा होने की आशंका है। भारत में मध्यमवर्गीय कर्मचारियों के सामने केवल मंदी ही नहीं, बल्कि अन्य कई कारणों से भी स्थिति गंभीर हो रही है।
विशेषज्ञों ने चेताया कि यदि अमेरिका अपने टैरिफ वापस नहीं लेता, तो क्रिसमस तक २ करोड़ भारतीयों की नौकरियों पर सीधा खतरा मंडरा सकता है। जो लोग २-५ लाख रुपए सालाना कमा रहे थे, उनकी नौकरियां पहले ही जा चुकी हैं और यह दायरा और बढ़ सकता है। मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी ने चेतावनी दी है कि बेरोजगारों को रोजगार देने के लिए तुरंत कदम उठाना जरूरी है, अन्यथा परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं। मुखर्जी ने कहा है कि नौकरियां कम होना मंदी की वजह से नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट ऑपरेशन्स, एआई और वैश्विक व्यापार स्थितियों की वजह से हो रहा है।
एक पॉडकास्ट में उन्होंने भारत में व्हाइट-कॉलर जॉब मार्वेâट में चल रही उथल-पुथल पर विस्तार से बात की। दरअसल नौकरी बाजार में बड़े पैमाने पर बदलाव आने वाला है। आगामी दिनों में आईटी, बैंकिंग और मीडिया जैसी मध्यमवर्गीय नौकरियों की जगह गिग (मशीन) जॉब ले लेंगी। भारत को इसका पूरा असर देखने में दो से तीन साल लग सकते हैं। इस दौरान सैलरी वाली नौकरियों का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो सकता है। इसके बाद भारत एक प्रमुख गिग इकॉनमी बन जाएगा।

 

 

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