कब्रों का दोबारा समय से पहले किया जा रहा इस्तेमाल
द्रुप्ति झा
कब्रिस्तान में शवों को दफनाया जाता है, लेकिन अफसोस की बात ये है कि शवों को दफनाने को जगह नहीं मिल रही है। हाल यह है कि मालाड-पश्चिम के मार्वे रोड पर स्थित कब्रिस्तान में जगह की कमी होने के कारण कब्र को चंद दिनों में ही खोदने और दूसरे शव को दफनाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। थोड़े ही दिनों में कब्र खोद देने से पहले से दफन शव पूरी तरह से मिट्टी में नहीं मिल पाता है। इस तरह की समस्या से मालाड-पश्चिम के लोग काफी परेशान है, लेकिन लोगों की शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
लोगों ने कब्रिस्तान की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई, साथ ही लोगों ने कहा कि कब्रिस्तान की स्थिति वहां दफनाए गए लोगों के परिवारों के लिए चिंताजनक है। निवासियों ने कहा कि आबादी के हिसाब से कब्रिस्तान की जगह कम पड़ रही है उनकी मांग हैं कि कब्रिस्तान के लिए बीएमसी और जगह उपलब्ध कराए। इस मामले में पी नॉर्थ के मनपा अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
