पूरे भारत में मची अराजकता को देखते हुए देश के करोड़ों लोग शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे को हर दिन याद कर रहे हैं। बिहार विधानसभा के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, ‘जो जीता, वो ही सिकंदर।’ अगर बालासाहेब आज यहां होते, तो वे उनका मजाक उड़ाते हुए कहते, ‘कौन है ये सिकंदर? क्या वो नए हिंदुत्ववादियों का नया बाप है? महाराष्ट्र और देश के पिता छत्रपति शिवाजी महाराज हैं। सिकंदर होगा तो भाजपा का बाप।’ मोदी-शाह ने बिहार में महिलाओं के वोट दस-दस हजार रुपए में खरीदे। महाराष्ट्र में ये वोट सिर्फ डेढ़ हजार रुपए में खरीदे गए और ये लोग हिंदुत्व के नाम पर ‘जीतं मय्या’ का ढोल पीट रहे हैं। हिंदूहृदयसम्राट को स्वीकार्य हो ये वो हिंदुत्व है ही नहीं। जम्मू-कश्मीर के ‘पंडितों’ के अंदर जाकर देखना चाहिए कि बालासाहेब का प्रखर हिंदुत्व क्या था और वैâसा था। गृह मंत्री शाह कहते हैं, ‘हमने आतंकवाद का अंत करके कश्मीर समस्या का समाधान किया।’ उनके शब्द उनके मुंह से निकल ही रहे थे कि आतंकवादियों ने श्रीनगर पुलिस थाने में बम विस्फोट कर नौ लोगों को मार डाला। दिल्ली में लाल किले के पास विस्फोट कर १५ लोगों को मार डाला गया। उससे पहले पुलवामा और पहलगाम हुए। कश्मीर में हिंदू पंडितों की घर वापसी नहीं हुई। पंडित समुदाय हिंदूहृदयसम्राट का नाम हर दिन पुकार रहा है। हिंदू पंडितों के एकमात्र रक्षक शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे थे। बालासाहेब ठाकरे हिंदू पंडितों के कवच थे। अमरनाथ यात्रा और वैष्णो देवी यात्रा सुचारु रूप से चले और हिंदुओं का बाल भी बांका न हो, इसके लिए हिंदुओं के सम्राट बालासाहेब ठाकरे पाक आतंकवादियों से लोहा लेकर उनका नामोनिशान मिटाने में लगे हुए थे। उनके
हिंदू प्रेम में
कोई पाखंड नहीं था। उनकी हिंदू सेवा में कोई स्वार्थ नहीं था। उनकी राष्ट्र सेवा में कोई मिलावट नहीं थी। उन्होंने हिंदू महिलाओं को दस हजार रुपए का लालच देकर वोट नहीं खरीदे। वे नि:स्वार्थ भाव से हिंदू और राष्ट्रसेवा करते रहे। बालासाहेब के सामाजिक विचार प्रगतिशील थे। अपने पिता की तरह, वे एक समाज सुधारक थे। शिवसेनाप्रमुख को महाराष्ट्र और मराठी भाषा पर जाज्वल्यमान गर्व था। उनका मत था कि महाराष्ट्र के सभी कार्य मराठी में होने चाहिए और महाराष्ट्र में शिक्षा का माध्यम भी मराठी होना चाहिए। भारत में प्रांतों के भाषाई विभाजन के अनुसार जो राज्य बने, उन्हें उस भाषा का सम्मान करना चाहिए और इस नीति के अनुसार, महाराष्ट्र में मराठी भाषा और मराठी लोगों का सम्मान किया जाना ही चाहिए, उनकी ऐसी दृढ़ भूमिका थी। उन्होंने मराठी के खिलाफ आनेवाले महाराष्ट्र के दुश्मनों को मैदान में हराया और पस्त कर दिया। आज, मुंबई और महाराष्ट्र में मराठी माणुस के अस्तित्व के बारे में कई सवाल उठे हैं। वे मौजूदा शासकों द्वारा निर्माण किए गए हैं। परप्रांतियों ने मुंबई की भूमि पर कब्जा कर लिया है और महाराष्ट्र की राजधानी में मराठी माणुस को ‘बाहरी’ बना दिया है। बालासाहेब ने ५५ साल पहले शिवसेना रूपी स्वाभिमान की चिंगारी जलाकर पूरे देश में महाराष्ट्र के स्वाभिमान की अलख जगाई थी। उन्होंने ‘उठो मराठी उठो …’ के तेजस्वी मंत्र से मराठी हृदय को प्रज्वलित किया था। जब तक ये मराठी हृदय धधक रहे हैं, मुंबई सुरक्षित रहेगी। मोदी-शाह की सत्ताधारी औलादों ने मुंबई-मराठी माणुस के स्वाभिमान को नष्ट किया और इसके लिए शिवसेना को निस्तेज किया। बालासाहेब के बाद उन्होंने मुंबई पर बिल्डरों का शासन थोप दिया, ताकि महाराष्ट्र मर जाए और मराठी माणुस गुलामी का जीवन जिएं। छत्रपति शिवाजी ने
शाइस्त खान की उंगलियां
काट दीं और अफजल खान की अंतड़ियां निकाल दीं, शिवाजी महाराज ने ईस्ट इंडिया कंपनी को खंडणी दे रहे व्यापारियों पर हमला किया और सूरत को लूटा, वही महाराष्ट्र जिसने देश को लड़ना सिखाया आज सूरत की तरह लूटा जा रहा है और खुद को मराठी कहने वाले लाचार अंधभक्त मोदी-शाह-अडानी के भजन गा रहे हैं। अगर आज बालासाहेब होते, तो उन सभी की पीठ पर हंटर चल रहा होता। देश में अदालतें, लोकतंत्र, चुनाव एक तमाशा बन गए हैं। लोकतंत्र में जनादेश महत्वपूर्ण है। आज, जीत और हार का पैâसला चुनाव आयोग के आदेश से ही होता है। जबकि देश में विपक्ष की सभी आवाजें दबाई जा रही हैं, लोगों को केवल एक आवाज याद आती है वह है हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे की। कभी उन्होंने सभी हिंदुओं का आह्वान किया तो कभी उन्होंने सभी मराठी माणुस को शिवतीर्थ से आह्वान कर एकजुट किया। महाराष्ट्र में मराठी माणुस की राजनीति की शोकांतिका करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। हालांकि, उद्धव और राज की एकता के प्रयोग से बालासाहेब का सपना एक बार फिर साकार होता दिख रहा है। शिवतीर्थ पर विश्राम कर रहे बालासाहेब ने मराठी माणुस को ‘एकता’ का संदेश दिया। यही एकता हिंदूहृदयसम्राट को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुंबई-महाराष्ट्र में मराठी एकता की ही जीत होगी। मराठी माणुस के हृदय में विराजमान छत्रपति शिवाजी महाराज की ही विजय होगी। बालासाहेब ठाकरे भारतीय राजनीति में एक असाधारण व्यक्ति थे। इस नरसिंह ने देश की राजनीति में महाराष्ट्र के महत्व को अधोरेखित किया। मराठी माणुस दुनिया में कहीं भी गया बालासाहेब ठाकरे ने उसके ‘मराठी’ होने के आत्मविश्वास को जगाया। बालासाहेब ठाकरे आज उसी मराठी माणुस से पूछ रहे हैं, ‘जय महाराष्ट्र! मराठी माणुस, क्या तुम जाग रहे हो? अगर सो गए, तो खत्म! जागते रहो!’
