‘वाइब्रेशन लेवल रिपोर्ट’ नहीं आने से रहिवासियों में भारी नाराजगी
सामना संवाददाता / मुंबई
प्रभादेवी में दर्जनों इमारतों को खतरा पैदा हो गया है। बिना पूरी तैयारी के एलफिंस्टन ब्रिज तोड़ने के कारण ऐसा हो रहा है। वहां पर बड़ी-बड़ी मशीनें लगा दी गई हैं। जिनके इस्तेमाल से धरती में वाइब्रेशन (कंपन) पैदा हो रहा है। इसका असर अगल-बगल की पुरानी इमारतों पर पड़ रहा है, जिससे उनमें दरारें पैदा हो रही हैं। इससे स्थानीय निवासियों में खासी नाराजगी है।
बता दें कि परेल के निवासियों ने एलफिंस्टन पुल के चल रहे विध्वंस से संबंधित महत्वपूर्ण आश्वासनों को पूरा न कर पाने के लिए अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की तीखी आलोचना की है। रिपोर्ट’ नहीं आने पर नाराज स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी इमारतें कभी भी गिर सकती हैं। भारी मशीनरी उनकी पुरानी इमारतों के पास खतरनाक तरीके से काम कर रही हैं। एमएमआरडीए और वीजेटीआई दोनों ने सोमवार को रिपोर्ट आने की पुष्टि नहीं की, जिससे निवासियों ने गहरी निराशा व्यक्त की। एक स्थानीय निवासी ने कहा, ‘सभी अधिकारी, चाहे वे किसी भी विभाग के हों, झूठे हैं। एक भी रिपोर्ट हमारे साथ साझा नहीं की गई है। सब झूठा वादा है।’ वाइब्रेशन स्तर की स्टडी कई निवासियों द्वारा शिकायत किए जाने के बाद शुरू किया गया था।
एमएमआरडीए का कहना है
इस बारे में एमएमआरडीए अधिकारियों का कहना है कि उन्हें स्वयं वीजेटीआई से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है, जैसे ही इसको हमारे साथ साझा किया जाएगा, हम निवासियों को सूचित कर देंगे।’ वहीं वीजेटीआई विशेषज्ञों का कहना है कि देरी जानबूझकर नहीं की जा रही है। निरीक्षण दल के एक वरिष्ठ सदस्य ने स्पष्ट किया कि ऐसी तकनीकी रिपोर्टों का विस्तृत विश्लेषण आवश्यक है।
काम रोकने की मांग
लोगों की बार-बार अपील के बावजूद तोड़-फोड़ की गतिविधियां नहीं रोकी गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वादा किए गए सुरक्षा आकलन के बिना काम जारी रखना जनहित के प्रति पूर्ण उपेक्षा दर्शाता है। कई निवासियों ने मांग की है कि एमएमआरडीए रिपोर्ट साझा किए जाने और शमन उपायों के लागू होने तक तोड़-फोड़ को तुरंत रोक दे।
