-हैदराबाद के शख्स ने पत्नी के व्यवहार से तंग आकर मांगा था तलाक
वैवाहिक रिश्तों और बदलते सामाजिक परिवेश को लेकर तेलंगाना हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अगर पत्नी कामकाजी है तो उसका खाना न बना पाना या सास की घरेलू कामों में मदद न कर पाना क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता। कोर्ट ने इसे वैवाहिक जीवन की सामान्य खींचतान करार देते हुए पति की तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया है।
हैदराबाद निवासी पेशे से लॉ ग्रेजुएट व्यक्ति ने अपनी पत्नी के खिलाफ तलाक की याचिका दायर की थी। उसकी पत्नी एक आईटी प्रोफेशनल है। पति का आरोप था कि शादी के बाद से ही उसकी पत्नी उसके और उसके परिवार के साथ सही व्यवहार नहीं कर रही थी। पति ने अदालत में दलील दी थी कि उसकी पत्नी न तो उसके लिए खाना बनाती थी और न ही घर के कामों में उसकी मां (सास) का हाथ बंटाती थी। इसके अलावा उसने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी अक्सर अपने मायके चली जाती थी और उसने अलग घर बसाने की मांग करके उस पर मानसिक दबाव बनाया। जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य और जस्टिस नगेश भीमपाका की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए बदलते दौर की चुनौतियों और कामकाजी दंपतियों की जीवनशैली को गहराई से समझा। अदालत ने पाया कि दोनों ही पति-पत्नी निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं और उनकी शिफ्ट का समय एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है।
पति का आरोप था कि शादी के बाद से ही उसकी पत्नी उसके और उसके परिवार के साथ सही व्यवहार नहीं कर रही थी। पति ने अदालत में दलील दी थी कि उसकी पत्नी न तो उसके लिए खाना बनाती थी और न ही घर के कामों में उसकी मां (सास) का हाथ बंटाती थी।
