-६०.७२ प्रतिशत हिस्सेदारी की कीमत
-₹५२,८७८ करोड़; ₹९४.४२ के पुराने रिजर्व और ₹७५.९९ के नए मूल्यांकन पर सवाल
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
आईडीबीआई बैंक की नियंत्रक हिस्सेदारी कनाडा की फेयरपैâक्स से जुड़ी इकाई को बेचने के फैसले पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। केंद्र और एलआईसी मिलकर ६०.७२ प्रतिशत हिस्सेदारी ८१ रुपए प्रति शेयर की दर से बेचेंगे। सौदे का कुल मूल्य करीब ५२,८७८ करोड़ रुपए है।
राहुल गांधी ने मुनाफे में लौटे बैंक की बिक्री का विरोध करते हुए कर्मचारियों का समर्थन किया और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों, सचिवों के मुख्य समूह और निर्धारित विनिवेश प्रक्रिया का पालन हुआ। मंत्रालय के अनुसार, ८१ रुपए की बोली ७५.९९ रुपए के स्वतंत्र बेंचमार्क से अधिक थी। विवाद इसलिए भी है क्योंकि प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ९४.४२ रुपए का रिजर्व मूल्य सामने आया था, जबकि बाद में अलग पद्धति से औसत निष्पक्ष मूल्य ७५.९९ रुपए निकला। सरकार का कहना है कि रिजर्व मूल्य ‘बदला’ नहीं गया, बल्कि नई प्रक्रिया में ताजा वित्तीय डेटा और अलग मूल्यांकन विधियां अपनाई गर्इं। दोनों दावों के बीच निर्णायक दस्तावेज मूल्यांकन रिपोर्ट, तुलनात्मक बैंकों का चयन और बोलियां खोलने की समयरेखा है। सार्वजनिक बैंक की बिक्री में ‘प्रक्रिया पूरी हुई’ पर्याप्त नहीं, प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से समझ में भी आनी चाहिए।
‘कांग्रेस के समय बैंक बनते थे, मोदी राज में बिकते हैं!’
कांग्रेस के समय देश में बैंक बनाए जाते थे, लेकिन मोदी राज में सरकारी बैंकों को बेचने का सिलसिला चल रहा है। आईडीबीआई बैंक के निजीकरण को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल किया कि जिस बैंक को कर्मचारियों ने अपनी मेहनत से घाटे से निकालकर मुनाफे में पहुंचाया, उसे सरकार निजी हाथों में क्यों सौंप रही है?
