मुख्यपृष्ठनए समाचारदिल्ली में हेराफेरी...एसआईआर की आड़ में वोट काटने की साजिश?

दिल्ली में हेराफेरी…एसआईआर की आड़ में वोट काटने की साजिश?

-यूपी में एक समुदाय के मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-७ के सामूहिक इस्तेमाल का आरोप
-३२ अर्जियों पर बीएलओ के हस्ताक्षर का दावा, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। फॉर्म-७ के जरिए एक विशेष समुदाय के बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सुनियोजित तरीके से बड़ी संख्या में फॉर्म-७ दाखिल कर एक समुदाय के मताधिकार को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने एक जिले में विशेष समुदाय के मतदाताओं के नाम वाले ३२ फॉर्म-७ पर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के हस्ताक्षर होने का आरोप लगाया। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग की। वहीं, केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की गई है। संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और एक साथ दाखिल किए गए फॉर्म-७ आवेदनों की पड़ताल की गई थी। हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील ने आयोग के हलफनामे का हवाला देते हुए दावा किया कि उसमें इन आवेदनों पर कार्रवाई नहीं किए जाने की बात कही गई है। इस पर उन्होंने आयोग के दावों और जमीनी कार्रवाई के बीच अंतर का सवाल उठाया। याचिकाकर्ता ने कर्नाटक और केरल में भी ऐसी घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एफआईआर दर्ज कराने के लिए शिकायत भेजी थी, जबकि उत्तर प्रदेश के मामले में अब तक वैसी कार्रवाई नहीं हुई है।

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