-वाढवण बंदरगाह के खिलाफ जनाआक्रोश का विस्फोट
-सपकाल की हुंकार, `बंदरगाह रद्द होने तक नहीं रुकेगी लड़ाई’
सामना संवाददाता / पालघर
पालघर के किसानों की जमीन, मछुआरों का रोजगार और हजारों परिवारों का भविष्य दांव पर लगाकर किसका विकास किया जा रहा है? महाराष्ट्र का या अडानी का? वाढवण बंदरगाह परियोजना के खिलाफ उठ रहे जनाक्रोश के बीच महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने केंद्र और भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने दो टूक कहा कि दिल्ली के `रंगा-बिल्ला’ को पालघर का विकास नहीं, बल्कि अडानी का विकास करना है। स्थानीय लोगों के संसार उजाड़ने वाली इस विनाशकारी परियोजना को रद्द किए बिना आंदोलन रुकने वाला नहीं है। कांग्रेस इस संघर्ष में पूरी ताकत से जनता के साथ खड़ी रहेगी।
वरोर-वाढवण में आयोजित `उलगुलान वाढवण बंदर विरोधी जनाक्रोश सभा’ में सपकाल ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक बंदरगाह के खिलाफ नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की जमीन, पर्यावरण, आजीविका और अस्मिता बचाने की लड़ाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अंग्रेजों की `फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाकर जन आंदोलनों में फूट डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने की अपील की। सपकाल के मुताबिक, राहुल गांधी की पहल पर देशभर के ३६ हजार आंदोलनों का पंजीकरण हुआ है, जिनमें ३,५०० आंदोलन महाराष्ट्र में चल रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, जमीन और पर्यावरण के सवालों पर जनता संघर्ष कर रही है। सभा में शिवसेना विधायक अंबादास दानवे, हितेंद्र ठाकुर, कपिल पाटील सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और हजारों नागरिक मौजूद थे। वाढवण का संघर्ष अब राजनीतिक समर्थन के साथ व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
