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आधे से ज्यादा भारतीय युवा जाना चाहते हैं विदेश … वित्तीय लाभ और करियर विकास के लिए यूरोप और एशिया को प्राथमिकता

हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के ५२ फीसदी युवा बेहतर करियर और उच्च आय के लिए विदेश जाने की योजना बना रहे हैं। यह जानकारी एआई आधारित ग्लोबल टैलेंट प्लेटफॉर्म टर्न ग्रुप ने साझा की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सर्वे लगभग ८,००० लोगों से बातचीत के आधार पर किया गया। टर्न ग्रुप ने अपने ईयर-एंड माइग्रेशन बैरोमीटर के माध्यम से यह अध्ययन प्रस्तुत किया है। सर्वे से पता चला कि इन युवाओं में विदेश जाने की प्रवृत्ति खास तौर पर वित्तीय और करियर की महत्वाकांक्षाओं से प्रेरित है। ५२ प्रतिशत लोग या तो विदेश जाने के बारे में विचार कर रहे हैं या इसके लिए सक्रिय तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि समय के साथ लोगों की पसंद बदल रही है। ५२ प्रतिशत ने अपनी इच्छित जगह बदल दी है, जबकि ४३ प्रतिशत ने अंतर्राष्ट्रीय अवसरों के लिए स्पष्ट प्राथमिकता जताई है।
माइग्रेशन का प्रमुख कारण वित्तीय लाभ (४६ प्रतिशत) है, इसके बाद करियर ग्रोथ (३४ प्रतिशत) और व्यक्तिगत सपने (९ प्रतिशत) और ग्लोबल एक्सपोजर (४ प्रतिशत) आते हैं। यह दर्शाता है कि वर्तमान माइग्रेशन लहर केवल जीवनशैली की आकांक्षाओं पर आधारित नहीं है, बल्कि आर्थिक परिणामों पर केंद्रित है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि युवाओं की पसंदीदा जगहों में बदलाव हो रहा है। अब यूरोप और एशिया की ओर झुकाव बढ़ा है। जर्मनी ४३ प्रतिशत युवाओं के लिए सबसे आकर्षक देश बना हुआ है। इसके बाद यूके (१७ प्रतिशत), जापान (९ प्रतिशत) और अमेरिका (४ प्रतिशत) का स्थान है। यह ट्रेंड भारतीय टैलेंट के लिए वैश्विक मांग में वृद्धि को दर्शाता है, जिसे ५७ प्रतिशत लोगों ने महसूस किया है।
नर्सों में भी जमकर माइग्रेशन
विशेष रूप से नर्सिंग पेशे में माइग्रेशन की प्रवृत्ति अधिक है। विदेश जाने वाली अधिकांश नर्सें (६१ प्रतिशत) टियर २ और टियर ३ शहरों और राज्यों से आती हैं। दिल्ली एनसीआर से १७ प्रतिशत नर्सें विदेश जा रही हैं, जो क्षेत्रीय जानकारी और अंतर्राष्ट्रीय प्लेसमेंट नेटवर्क तक पहुंच को दर्शाता है। वहीं, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत का योगदान ९ प्रतिशत है, जो वैश्विक हेल्थकेयर सिस्टम में इनके लंबे समय से चले आ रहे महत्वपूर्ण योगदान को दिखाता है।
सर्वे यह भी संकेत देता है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय टैलेंट की मांग लगातार बढ़ रही है। वित्तीय लाभ, करियर विकास, अंतर्राष्ट्रीय अनुभव और व्यक्तिगत सपनों की पूर्ति के लिए युवा अब पहले से अधिक सक्रिय रूप से विदेश जाने के विकल्प तलाश रहे हैं। टर्न ग्रुप की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भविष्य में ग्लोबल माइग्रेशन में भारतीय युवाओं की भागीदारी और बढ़ने की संभावना है।
इस अध्ययन से यह भी पता चलता है कि विदेश जाने की प्रवृत्ति केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के छोटे शहरों और कस्बों के युवा भी इसका हिस्सा बन रहे हैं। ऐसे में भारत के विभिन्न हिस्सों से वैश्विक स्तर पर काम करने वाले पेशेवरों की संख्या लगातार बढ़ेगी।

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