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मनपा के चुनावी रण में खूनखराबा! …दहिसर, मालवणी, बांद्रा में हिंसा

-लोकतंत्र पर गहराता संकट
जेदवी / मुंबई
मुंबई महानगरपालिका चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे शहर की सड़कों पर सियासी गर्मी खतरनाक मोड़ लेती जा रही है। दहिसर से मालवणी और अब बांद्रा तक चुनाव प्रचार के दौरान हुई हिंसक घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि इस बार का चुनाव विकास नहीं, बल्कि डर और दबाव के साए में लड़ा जा रहा है।
दहिसर पश्चिम के वार्ड क्रमांक-१ में सोमवार शाम प्रचार के दौरान हालात बेकाबू हो गए। कांदरपाड़ा इलाके में शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं पर मतदाता विजय लक्ष्मण पाटील के घर में जबरन घुसने, विरोध करने पर परिवार के सदस्यों को बेरहमी से पीटने और महिला से छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित के अनुसार, उन्हें, उनकी पत्नी और भाई को घर से बाहर खींचकर झंडों के डंडों और बांसों से पीटा गया, गालियां दी गईं और जान से मारने की धमकियां दी गईं। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद इलाके में तनाव पैâल गया। एमएचबी कॉलोनी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता २०२३ के तहत १२ से अधिक लोगों पर मामला दर्ज कर कई आरोपियों को हिरासत में लिया है। इस घटना के बाद विपक्ष ने हमला तेज कर दिया। कांग्रेस उम्मीदवार शीतल म्हात्रे ने कहा कि दहिसर में खुलेआम ‘गुंडाराज’ चल रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। शिवसेना (उद्धव बालासहेब ठाकरे) के विनोद घोसालकर ने चुनाव आयोग को आगाह करते हुए कहा कि यदि तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए गए तो मतदान के दिन भय और अराजकता पैâल सकती है।
प्रचार रैली पर पथराव
दूसरी ओर मालाड पश्चिम के मालवणी इलाके में निर्दलीय उम्मीदवार अरबाज असलम शेख पर प्रचार के दौरान अज्ञात व्यक्ति ने पत्थर फेंक दिया। माथे पर चोट लगने से वे घायल हो गए। घटना उस समय हुई जब वे अपने समर्थकों के साथ रैली निकाल रहे थे। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चाकू से हमला, उम्मीदवार गंभीर
चुनावी हिंसा की सबसे गंभीर घटना बांद्रा से सामने आई, जहां वार्ड-९२ से शिवसेना के आधिकारिक उम्मीदवार हाजी सलीम कुरैशी पर प्रचार के दौरान चाकू से हमला किया गया। ज्ञानेश्वर नगर इलाके में हुई इस वारदात में उन्हें पेट में गंभीर चोट आई है। फिलहाल, उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है और पुलिस हमलावरों की तलाश में जुटी है।
सवालों के घेरे में सुरक्षा और निष्पक्षता
दहिसर, मालवणी और बांद्रा की ये घटनाएं सिर्फ अलग-अलग वारदातें नहीं, बल्कि मनपा चुनाव से पहले बिगड़ती कानून-व्यवस्था की तस्वीर पेश कर रही हैं। पुलिस हालात काबू में होने का दावा जरूर कर रही है, लेकिन बढ़ती हिंसा ने आम मतदाता को डरा दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है क्या मुंबई में लोकतंत्र सुरक्षित है, या मनपा चुनाव अब ताकत और खौफ की लड़ाई बनते जा रहे हैं?

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