राजस्थान की मिड-डे मील योजना में करीब २०२३ करोड़ रुपए से अधिक के घोटाले का खुलासा हुआ। उक्त राशि से विद्यार्थियों को ३.१२ करोड़ कॉम्बो पैकेट उपलब्ध करवाना बताया गया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कॉनपैâड के अधिकारियों, केंद्रीय भंडार के अफसरों और निजी फर्मों सहित २१ नामजद आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। इन आरोपियों में कांग्रेस सरकार में गृहराज्य मंत्री रहे राजेंद्र यादव के दो पुत्रों व कुछ रिश्तेदारों के भी नाम बताए जा रहे हैं। इसके अलावा पांच आईएएस अधिकारियों सहित ४० अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध होना सामने आया है।
एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि मामला कोविड-१९ महामारी के दौरान स्कूल बंद रहने की अवधि में विद्यार्थियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के नाम पर किए गए भ्रष्टाचार से जुड़ा है। एसीबी के अनुसार, राज्य सरकार की मिड-डे मील योजना के तहत कॉनपैâड के माध्यम से दाल, तेल, मसाले आदि के कॉम्बो पैक की आपूर्ति कराई गई थी। इन्हें एफएसएसएआई और एगमार्क मानकों के अनुरूप बताते हुए विद्यालयों तक डोर-स्टेप डिलिवरी का दावा किया गया। शिकायतें मिलने पर एसीबी ने प्राथमिक और फिर विस्तृत जांच की, जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। एसीबी ने अभी कॉनपैâड के ८ अधिकारी-कर्मचारी, केंद्रीय भंडार के ३ अधिकारी, निजी फर्मों व उनके प्रोपराइटर समेत कुल २१ व्यक्तियों को नामजद किया है। सूत्रों के मुताबिक, मामले में ५ आईएएस अधिकारियों सहित ४० व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध होना अब तक की जांच में सामने आया है। सरकार से जांच के लिए ३३ अधिकारियों के खिलाफ नए कानून १७-ए के तहत स्वीकृति मांग रखी है, लेकिन अभी करीब १३ के खिलाफ जांच करने की स्वीकृति ही मिली है, जिनको मुकदमे में नामजद किया गया है।
एसीबी की जांच में चौंकानेवाला खुलासा
एसीबी की जांच में सामने आया कि मिड-डे मील योजना से जुड़े अधिकारियों और कॉनपैâड के अफसरों ने आपसी मिलीभगत से नियमों में मनमाने बदलाव किए। पात्र और योग्य फर्मों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर अपनी चहेती फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाया। टेंडर मिलने के बाद इन फर्मों ने कार्य को अवैध रूप से सबलेट कर दिया, जिससे फर्जी आपूर्तिकर्ताओं और ट्रांसपोर्टरों का संगठित नेटवर्क खड़ा हुआ।
